योजना का उद्देश्य
नारियल का पेड़ मानव जीवन में बेहद उपयोगी माना जाता है। इसके फल, पत्ते, छाल और तने का उपयोग विभिन्न उद्योगों और घरेलू कार्यों में होता है। बिहार सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य नारियल के अपरंपरागत क्षेत्रों में पौधारोपण कर किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।
कौन उठा सकता है लाभ?
इस योजना के तहत नारियल के पौधे घर के आस-पास, बाड़ी, किचेन गार्डन या खेत में लगाने के इच्छुक किसान प्राप्त कर सकते हैं। शहरी क्षेत्र के लोग भी योजना का लाभ उठा सकते हैं।
पौधों की कीमत और सब्सिडी
प्रति पौधा की इकाई लागत 85 रुपये निर्धारित की गई है।
इसमें उत्पादन खर्च 70 रुपये और जिला परिवहन खर्च 15 रुपये शामिल है।
किसानों को 75% सब्सिडी मिलेगी, यानी उन्हें पौधा खरीदने के लिए केवल 21 रुपये ही जमा करने होंगे।
प्रत्येक लाभार्थी को कितने पौधे मिलेंगे?
न्यूनतम 5 पौधे और अधिकतम 712 पौधे (प्रति हेक्टेयर 178 पौधे) सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज़
पौधों का वितरण केवल उस जगह किया जाएगा, जिसकी भूमि/राजस्व रसीद प्रस्तुत की गई हो। यदि आवेदक का नाम भूमि स्वामित्व या रसीद में स्पष्ट नहीं है, तो भूमि स्वामित्व/राजस्व रसीद के साथ वंशावली प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
आपको बता दें की यह योजना किसानों को कम लागत में नारियल के पौधे उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने में मदद करेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विविधता बढ़ाने और स्थानीय बाजार को सुदृढ़ करने में भी यह योजना अहम साबित होगी।

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