1 .किसानों को मिलेगी सीधी आर्थिक मदद
राज्य सरकार ने किसानों के लिए ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि’ शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत किसानों को हर साल ₹3000 की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। यह राशि केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि से अलग होगी और सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस अतिरिक्त मदद से छोटे और सीमांत किसानों को खेती के शुरुआती खर्च में राहत मिलेगी।
2 .कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर ऐतिहासिक निवेश
खेती को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए सरकार ने ‘बिहार एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन’ की घोषणा की है। इस मिशन के तहत करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश से कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट, ग्रेडिंग सेंटर और वेयरहाउस का नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इससे फसल की बर्बादी रुकेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
3 .बिहार में अब स्मार्ट खेती की ओर कदम
बिहार सरकार खेती में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। AI आधारित यांत्रिक कृषि मिशन के तहत आधुनिक मशीनों पर किसानों को 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इससे खेती में लागत कम होगी, श्रम की निर्भरता घटेगी और उत्पादन की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो सकेगी। इसके साथ ही बिहार को कृषि स्टार्टअप के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
4 .सरकार का सात निश्चय-3 के तहत बड़े लक्ष्य
सरकार ने 2025 से 2030 तक के लिए ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि क्षेत्र में बड़े लक्ष्य तय किए हैं। मक्का, दलहन और तिलहन के उत्पादन को कई गुना बढ़ाने की योजना है। साथ ही फल-सब्जी उत्पादन को दोगुना करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोसेसिंग और पैकेजिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। ई-नाम के माध्यम से मंडियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर किसानों को पारदर्शी बाजार उपलब्ध कराने की भी तैयारी है।
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