भारत को मिलेगी 6 हाईटेक पनडुब्बियां, चीन पाक के उड़े होश!

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना जल्द ही अपनी अंडरवॉटर स्ट्राइक क्षमता में ऐसा इजाफा करने जा रही है, जो हिंद महासागर में शक्ति संतुलन को पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ सकता है। भारत और जर्मनी के बीच Project 75(I) के तहत होने वाला पनडुब्बी समझौता अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। यह सौदा सिर्फ छह पनडुब्बियों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर हाईटेक पनडुब्बी निर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

10 अरब डॉलर की डील

करीब 10 अरब डॉलर (₹84,000 करोड़) की इस डील के तहत भारतीय नौसेना को छह अत्याधुनिक पारंपरिक (कन्वेंशनल) पनडुब्बियां मिलेंगी। ये पनडुब्बियां पूरी तरह भारत की रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन की जा रही हैं। यही वजह है कि इन्हें किसी एक विदेशी मॉडल की नकल नहीं, बल्कि एक हाइब्रिड और कस्टम-मेड प्लेटफॉर्म माना जा रहा है। 

कैसी होंगी ये नई पनडुब्बियां?

Project 75(I) के तहत बनने वाली पनडुब्बियां जर्मनी की U-214 और नई पीढ़ी की U212CD क्लास से प्रेरित होंगी, लेकिन इनका स्वरूप पूरी तरह भारतीय होगा। यह लगभग 2,500 टन का विस्थापन, जो मौजूदा जर्मन मॉडल्स से काफी बड़ा है। इससे ज्यादा ईंधन, हथियार और रसद ले जाने की क्षमता मिलेगी। बड़े आकार का फायदा यह होगा कि पनडुब्बी लंबे समय तक हिंद महासागर में गश्त कर सकेगी, बिना बार-बार बेस लौटे। इनमें भारतीय टॉरपीडो, मिसाइलें और कमांड-कंट्रोल सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे यह पूरी तरह भारतीय नौसेना की युद्ध नीति के अनुरूप होगी।

चीन और पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

चीन पहले से ही हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पनडुब्बी गतिविधियां बढ़ा रहा है, वहीं पाकिस्तान अपनी नौसेना को चीनी मदद से मजबूत कर रहा है। ऐसे में भारत की ये नई पनडुब्बियां समुद्र के नीचे साइलेंट डिटरेंस बनाएंगी, दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों पर नजर रखेंगी और संकट के समय निर्णायक प्रहार की क्षमता देंगी। खास बात यह है कि AIP तकनीक से लैस ये पनडुब्बियां पारंपरिक होते हुए भी कई मामलों में न्यूक्लियर पनडुब्बियों जैसी मारक क्षमता दिखा सकती हैं।

MDL को मिला एक्सपोर्ट का अधिकार: गेम-चेंजर फैसला

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी उपलब्धि मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) को मिला एक्सपोर्ट लाइसेंस है। इसका मतलब यह है कि भारत इन पनडुब्बियों को मित्र देशों को बेच सकेगा, वैश्विक पनडुब्बी बाजार में भारत की एंट्री होगी, रक्षा निर्यात से भारत की आर्थिक और रणनीतिक ताकत बढ़ेगी। Project 75(I) की आखिरी पनडुब्बी तक पहुंचते-पहुंचते इसमें करीब 60 प्रतिशत स्वदेशी कंटेंट होगा।

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