क्या बदला है जीडीपी मापने के तरीके में?
सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) ने राष्ट्रीय आय की गणना में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के वर्तमान ढांचे को बेहतर तरीके से पकड़ना है।
1 .नया आधार वर्ष: अब आर्थिक गणना का आधार वर्ष 2022-23 रखा गया है। पुराने आधार वर्ष के कारण कई नए उद्योग, डिजिटल सेवाएं और उपभोक्ता पैटर्न पूरी तरह परिलक्षित नहीं हो पाते थे। नया आधार वर्ष आज की आर्थिक वास्तविकताओं को अधिक सटीक रूप से दर्शाता है।
2 .डिजिटल लेन-देन का उपयोग: Goods and Services Tax Network के डेटा को अब प्रत्यक्ष रूप से शामिल किया गया है। इससे कारोबार की वास्तविक गतिविधि का अधिक स्पष्ट अनुमान मिलता है। डिजिटल भुगतान और रजिस्ट्रेशन आंकड़ों के कारण उपभोग और निवेश के आकलन में पारदर्शिता आई है।
3 .अनौपचारिक और गिग सेक्टर की पहचान: डिलीवरी पार्टनर, कैब चालक, फ्रीलांसर और घरेलू सहायक जैसे वर्ग अब अर्थव्यवस्था की औपचारिक गणना का हिस्सा हैं। इससे कुल आर्थिक गतिविधि का दायरा पहले से व्यापक हो गया है।
4 .डबल डिफ्लेशन पद्धति: उत्पादन में इस्तेमाल कच्चे माल और तैयार उत्पाद की कीमतों को अलग-अलग समायोजित करने की प्रणाली अपनाई गई है। इससे वास्तविक मूल्य संवर्धन का बेहतर आकलन संभव हुआ है।
वैश्विक परिदृश्य में भारत
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आकलनों के अनुसार भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से ऊपर बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में देश का आर्थिक आकार कई विकसित राष्ट्रों के बराबर पहुंच सकता है। भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता हैं।
असली परीक्षा: प्रति व्यक्ति आय
हालांकि कुल जीडीपी में वृद्धि प्रभावशाली है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय अभी भी विकसित देशों की तुलना में काफी कम है। विकास को व्यापक और समावेशी बनाना अगली बड़ी चुनौती होगी। जब तक ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे व्यवसायों और निम्न आय वर्ग की आय में वास्तविक सुधार नहीं होगा, तब तक विकास अधूरा माना जाएगा।

0 comments:
Post a Comment