500 रुपये में मालिकाना हक
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि कोई भी ड्राइवर, जिसे ‘सारथी’ कहा गया है, केवल 500 रुपये का शेयर लेकर इस कोऑपरेटिव का हिस्सा बन सकता है। शेयर खरीदते ही उसे कंपनी में भागीदारी का अधिकार मिलता है। जैसे-जैसे सदस्यों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे सहकारिता का दायरा भी विस्तृत होगा। साथ ही, भविष्य में होने वाले बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चुनावों में सारथियों के लिए कुछ सीटें आरक्षित रखने का प्रस्ताव है। इससे ड्राइवर सीधे नीति-निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में अपनी आवाज उठा सकेंगे।
कमाई और मुनाफे का स्पष्ट फॉर्मूला
भारत टैक्सी मॉडल में आय के बंटवारे का ढांचा पारदर्शी रखा गया है:
1 .कुल कमाई का 80% हिस्सा सीधे ड्राइवर के खाते में जाएगा, जो तय करेगा कि उसने कितने किलोमीटर की सेवा दी।
2 .20% राशि कोऑपरेटिव के पूंजी फंड में जमा की जाएगी, जिससे प्लेटफॉर्म के विस्तार, तकनीकी सुधार और प्रबंधन खर्च पूरे किए जाएंगे।
3 .शुरुआती तीन वर्षों तक इस पूंजी का उपयोग नेटवर्क विस्तार में किया जाएगा।
4 .उसके बाद यदि शुद्ध मुनाफा होता है, तो उसका भी 80% सारथियों और 20% भारत टैक्सी के बीच बांटा जाएगा।
5 .यह व्यवस्था ड्राइवरों को केवल दैनिक आय ही नहीं बल्कि दीर्घकालिक लाभ में भी हिस्सेदारी देती है।
‘सारथी दीदी’ – महिला सशक्तिकरण की पहल
इस मॉडल में महिला ड्राइवरों के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल है, जिसे ‘सारथी दीदी’ नाम दिया गया है। ऐप में ऐसा विकल्प जोड़ा जाएगा, जिससे अकेली महिला यात्रियों को प्राथमिकता के आधार पर महिला ड्राइवर उपलब्ध कराई जा सके।
बिना कमीशन और पारदर्शी किराया
यह प्लेटफॉर्म बिना किसी कमीशन मॉडल पर आधारित बताया गया है। किराए स्थानीय परिवहन प्राधिकरणों द्वारा पूर्व-स्वीकृत होंगे और बुकिंग से पहले स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे। दूरी, समय, रात का शुल्क और वापसी किराया जैसे सभी तत्वों को पारदर्शी तरीके से जोड़ा जाएगा, बिना किसी छिपी फीस या सर्ज प्राइसिंग के।
तीन वर्षों में देशव्यापी विस्तार का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में देश के हर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन तक भारत टैक्सी की पहुंच बनाना है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह देश का पहला व्यापक स्तर का ड्राइवर-स्वामित्व वाला मोबिलिटी प्लेटफॉर्म बन सकता है, जो सहकारिता आंदोलन को डिजिटल युग से जोड़ता है।

0 comments:
Post a Comment