इजरायल-ईरान की भीषण जंग शुरू, अमेरिका भी शामिल

न्यूज डेस्क। इजरायल और ईरान के बीच एक और गंभीर सैन्य संघर्ष का आगाज हुआ, जिसमें अमेरिका ने भी अपनी भूमिका निभानी शुरू कर दी है। यह टकराव इजरायल और ईरान के बीच पिछले कई सालों से जारी तनाव का एक और परिणाम है, और इसने वैश्विक सुरक्षा पर गहरे असर डालने की संभावना जताई है।

इस्राइल के हमले और उनके उद्देश्य

शनिवार को, इजरायल ने ईरान के विभिन्न प्रमुख ठिकानों पर एक साथ 30 से अधिक मिसाइल हमले किए। इन हमलों का निशाना ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के दफ्तर, राष्ट्रपति भवन, और विभिन्न मंत्रालयों सहित अन्य रणनीतिक ठिकाने बने। इजरायल का दावा है कि उसने यह कार्रवाई "खतरों को दूर करने" के उद्देश्य से की है। इस हमले के बाद तेहरान में तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जो पूरे शहर में हड़कंप का कारण बनीं।

ऑपरेशन 'शील्ड ऑफ जूडा'

इजरायल ने इस सैन्य ऑपरेशन का नाम 'शील्ड ऑफ जूडा' रखा है, जिसका अर्थ है यहूदियों की सुरक्षा। ऑपरेशन के तहत, ईरान के छह बड़े शहरों में सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले के दौरान ईरान के अधिकांश प्रमुख हवाई अड्डों को भी निशाना बनाया गया है। इस्राइल ने यह कदम सीधे तौर पर ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को नष्ट करने के लिए उठाया है।

अमेरिकी समर्थन: संयुक्त कार्रवाई?

हालांकि इजरायल ने आधिकारिक रूप से अकेले इस हमले का संचालन करने का दावा किया है, लेकिन अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स ने यह संकेत दिया है कि अमेरिका ने इजरायल को इस हमले में रणनीतिक सहयोग दिया है। सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हमलों को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच गहरे तालमेल की संभावना है।

ईरान की प्रतिक्रिया और कड़े कदम

इजरायल के हमलों के बाद, ईरान ने तीव्र प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी है। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि इस हमले का उचित जवाब दिया जाएगा, और उनका सैन्य बागीचियों को निशाना बनाने के लिए तैयार है। ईरान की सरकारी टेलीविजन रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है, लेकिन वे देश में ही हैं। इसके साथ ही, ईरान ने यह भी बताया कि वह इस हमले के लिए बदला लेने की योजना बना रहा है, जो 'करारा' होगा।

ट्रंप की धमकी और भविष्य की रणनीतियाँ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले के दौरान अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ट्रंप ने कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु शक्ति बनने का मौका नहीं मिलेगा, और अमेरिका ईरान के परमाणु हथियारों को पूरी तरह नष्ट करेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के भीतर सैन्य ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं, जिनका उद्देश्य ईरान के मिसाइल और नौसेना को समाप्त करना है।

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