नई नीति कब से लागू होगी और क्या बदलाव हैं?
शिक्षा विभाग पिछले नियमों को संशोधित कर रहा है और माना जा रहा है कि मार्च तक इसका अंतिम प्रारूप तैयार हो जाएगा। इसके बाद इसे राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाएगा। नई नीति के अनुसार जून में बड़े पैमाने पर शिक्षकों का तबादला किया जा सकता है।
पुरानी नियमावली में शिक्षक नियुक्ति की तारीख से पांच साल तक किसी दूसरे स्कूल में तबादले पर रोक का प्रावधान था। शिक्षक संघों के विरोध के बाद इसे संशोधित कर तीन साल का समय तय किया जा रहा है। साथ ही असाध्य और गंभीर बीमारियों या विशेष परिस्थितियों में तीन साल से पहले भी तबादला संभव होगा। इस नीति के दायरे में राज्य के लगभग छह लाख शिक्षक शामिल होंगे।
तबादले की प्रक्रिया
जिलास्तरीय शिक्षकों के तबादले के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय कमेटी बनाई जाएगी। इसमें उप विकास आयुक्त, एडीएम स्तर का अधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी शामिल होंगे। वहीं, प्रमंडल स्तर के शिक्षकों के तबादले के लिए प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी का गठन होगा। इस कमेटी में क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (आरडीडीई) और प्रमंडल स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।
कमेटियों की सिफारिशों के आधार पर शिक्षकों के तबादले किए जाएंगे। इससे न केवल तबादला प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि शिक्षक और प्रशासन दोनों को सुविधा होगी।
क्या इससे लाभ होगा?
नई नीति से शिक्षकों को अपने करियर में स्थिरता और भविष्य की योजना बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, विशेष परिस्थितियों में समय से पहले तबादला की संभावना कर्मचारियों के लिए राहत का कारण बनेगी। बिहार में शिक्षकों के लिए यह बदलाव चुनाव और शिक्षा क्षेत्र के बेहतर प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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