अब तक क्या व्यवस्था थी?
अब तक गोल्ड और सिल्वर ETF की नेट एसेट वैल्यू (NAV) अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क पर आधारित रहती थी। इसके लिए London Bullion Market Association (LBMA) द्वारा जारी लंदन रेट को आधार माना जाता था। विदेशी कीमत को भारतीय बाजार के अनुरूप बनाने के लिए उसे डॉलर से रुपये में बदला जाता था, फिर आयात शुल्क, टैक्स और अन्य खर्च जोड़े जाते थे। यानी अंतिम कीमत कई चरणों के बाद तय होती थी और सीधे घरेलू स्पॉट रेट पर आधारित नहीं होती थी।
नए नियम में क्या बदलाव?
सेबी के संशोधित नियमों के तहत अब म्यूचुअल फंड हाउस सोना और चांदी की कीमत भारतीय स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध स्पॉट प्राइस के आधार पर तय करेंगे। इसका अर्थ है कि ETF की NAV अब घरेलू बाजार की वास्तविक दर से सीधे जुड़ी रहेगी। इस प्रक्रिया को एकरूप बनाने के लिए Association of Mutual Funds in India (AMFI) भी सेबी के साथ समन्वय करेगा, ताकि सभी फंड हाउस एक समान पद्धति अपनाएं।
निवेशकों के लिए इसका मतलब
इस बदलाव से मूल्य निर्धारण अधिक स्पष्ट और सरल होगा। विदेशी दरों और मुद्रा परिवर्तन की जटिल गणना से जुड़ी असमंजस की स्थिति कम होगी। अलग-अलग ETF के रिटर्न में दिखाई देने वाला मामूली अंतर भी घट सकता है, क्योंकि सभी योजनाएं एक ही घरेलू मूल्य को आधार बनाएंगी। इसके अलावा, कीमत अब भारतीय मांग-आपूर्ति की स्थिति को अधिक सटीक रूप से दर्शाएगी, जिससे निवेशक बाजार की वास्तविक चाल समझ सकेंगे।
आगे क्या है बड़ी उम्मीद?
1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला यह नियम कमोडिटी आधारित निवेश को अधिक पारदर्शी और घरेलू बाजार उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे गोल्ड और सिल्वर ETF निवेशकों को कीमत समझने और तुलना करने में आसानी होगी, साथ ही बाजार में भरोसा भी मजबूत होने की संभावना है।

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