क्या है परियोजना की खासियत?
यह हाईवे बाराबंकी से होकर गुजरेगा और नेपाल सीमा तक बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। परियोजना के तहत छह लेन के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाएगा, जबकि प्रारंभिक चरण में चार लेन का एक्सप्रेसवे विकसित किया जाएगा। भविष्य में यातायात बढ़ने पर इसे पूर्ण छह लेन में विस्तारित किया जा सकेगा।
हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के अंतर्गत कुल लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 60 प्रतिशत निवेश निजी डेवलपर द्वारा किया जाएगा। निर्माण, डिजाइन, वित्तपोषण और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनी के पास होगी। बदले में उसे 15 से 20 वर्षों तक तयशुदा भुगतान मिलता रहेगा।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी गति
यह हाईवे पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। नेपाल से सटे इलाकों में आयात-निर्यात और सीमावर्ती व्यापार को मजबूती मिलेगी। साथ ही, पर्यटन के लिहाज से भी यह मार्ग अहम साबित हो सकता है, क्योंकि बहराइच और आसपास के जिलों में प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं हैं।
रोजगार और निवेश के अवसर
इतने बड़े स्तर की अवसंरचना परियोजना से निर्माण चरण में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। सड़क बनने के बाद इसके किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक पार्क और व्यावसायिक केंद्र विकसित हो सकते हैं। इससे क्षेत्र में निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

0 comments:
Post a Comment