भारत करेगा खूंखार मिसाइल डिफेंस ट्रेनिंग, बढ़ेगी सुरक्षा ताकत

नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों के बीच भारतीय नौसेना अपने युद्धपोतों की सुरक्षा को नई धार देने की तैयारी में है। नौसेना ने अगली पीढ़ी के Expendable Aerial Target (EAT-NG) सिस्टम के लिए सूचना अनुरोध (RFI) जारी किया है। इन विशेष ड्रोन का उपयोग अभ्यास के दौरान वास्तविक दुश्मन मिसाइल की तरह किया जाएगा, जिन्हें बाद में मार गिराया जाएगा।

क्या होंगे ये खास ड्रोन?

Expendable Aerial Target दरअसल ऐसे टारगेट ड्रोन हैं जो दुश्मन की तेज रफ्तार, समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ने वाली एंटी-शिप मिसाइलों की नकल करते हैं। नौसेना चाहती है कि ये ड्रोन समुद्र से लगभग 5 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरें और अचानक हमले जैसी स्थिति तैयार करें। इससे जहाजों पर तैनात मिसाइल और गन सिस्टम की वास्तविक क्षमता का परीक्षण किया जा सकेगा।

क्यों जरूरी है नई ट्रेनिंग?

भारतीय युद्धपोत पहले से उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली बराक-8 से लैस हैं। लेकिन किसी भी सिस्टम की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए वास्तविक परिस्थितियों में अभ्यास बेहद जरूरी होता है। नए टारगेट ड्रोन को मिसाइल या तोप से निशाना बनाकर गिराया जाएगा, ताकि नौसैनिकों को असली खतरे जैसा अनुभव मिल सके।

तकनीकी मानक क्या होंगे?

नौसेना की शर्तों के अनुसार इन ड्रोन की रफ्तार करीब 300 मीटर प्रति सेकंड होनी चाहिए। वे कम से कम एक घंटे तक उड़ान भर सकें और बेहद कम ऊंचाई पर भी स्थिर रहें। साथ ही 2G तक के तीखे मोड़ लेने की क्षमता होनी चाहिए, ताकि वे चुस्त दुश्मन मिसाइल जैसा व्यवहार कर सकें। एक कंट्रोल स्टेशन से कई ड्रोन एक साथ संचालित करने की सुविधा भी आवश्यक होगी।

लॉन्च और रिकवरी व्यवस्था

इन टारगेट ड्रोन को जहाज या तट से रॉकेट सहायता से लॉन्च किया जा सकेगा। समुद्र की मध्यम स्थिति और तेज हवाओं में भी इनके संचालन की क्षमता जरूरी होगी। अभ्यास पूरा होने के बाद ड्रोन कुछ समय तक पानी पर तैर सकें, ताकि उन्हें वापस लाकर डेटा का विश्लेषण किया जा सके।

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