10 साल बाद सैलरी में बड़ा बदलाव
राज्य में आखिरी बार सैलरी में बड़ा बदलाव अप्रैल 2016 में हुआ था, जब 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की गई थीं। तब से अब तक कर्मचारियों के वेतन संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। अब 2026 में 8वें असम वेतन आयोग की स्थापना के साथ पूरी समीक्षा प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई और बढ़ते खर्च के बीच राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
आयोग की जिम्मेदारी और संरचना
सरकार ने इस आयोग की कमान रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुभाष चंद्र दास को सौंपी है। आयोग में उनके अलावा सात अन्य सदस्य शामिल होंगे, जो राज्य की आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों की जरूरतों का अध्ययन करेंगे। इसमें वित्त विभाग, कार्मिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रतुल महंता भी सदस्य हैं। आयोग का मुख्यालय गुवाहाटी में होगा और सचिव, वित्त विभाग, सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।
रिपोर्ट का समय और प्रक्रिया
8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने और सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस दौरान आयोग पुराने सैलरी रिवीजन, देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और केंद्रीय वेतन आयोग की संभावित सिफारिशों का अध्ययन करेगा। रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से सैलरी और भत्तों में बदलाव लागू कर सकती है।
किसे मिलेगा लाभ और किसे नहीं
यह आयोग राज्य सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए काम करेगा, जिनकी सैलरी पुराने संरचना पर आधारित है। हालांकि, ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारी, कॉलेज प्रोफेसर, मेडिकल और तकनीकी संस्थानों के कर्मचारी, और न्यायिक सेवा के अधिकारी इस आयोग के दायरे में शामिल नहीं होंगे।

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