8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों की 6 बड़ी मांग, जानें पूरी खबर

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों में नई उम्मीद जगी है। जैसे ही सरकार ने आयोग के गठन का संकेत दिया, विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को व्यवस्थित रूप से सामने रखना शुरू कर दिया। अब यह मुद्दा सिर्फ वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी वेतन संरचना, पदोन्नति प्रणाली, पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं तक फैल चुका है।

दिल्ली में होने वाली नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) जेसीएम की बैठक में इन सभी मांगों को समेकित कर एक साझा प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। बाद में यह प्रस्ताव आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि इस बार वेतन ढांचे को पूरी तरह व्यावहारिक और समयानुकूल बनाने पर जोर रहेगा।

1 .फिटमेंट फैक्टर: वेतन बढ़ोतरी की कुंजी

वर्तमान चर्चा का केंद्र 3.25 फिटमेंट फैक्टर है। यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो कर्मचारियों की मूल वेतन राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को देखते हुए मौजूदा वेतन संरचना पर्याप्त नहीं रह गई है।

2 .7% वार्षिक इंक्रीमेंट की मांग

अभी कर्मचारियों को 3 प्रतिशत सालाना वेतन वृद्धि मिलती है। लेकिन संगठनों का कहना है कि यह दर वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। प्रस्ताव है कि सालाना वृद्धि 7 प्रतिशत की जाए या साल में दो बार संशोधन की व्यवस्था बने। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों की वास्तविक आय में स्थिरता आएगी और महंगाई का असर कम होगा।

3 .परिवार इकाई बढ़ाने का प्रस्ताव

न्यूनतम वेतन तय करने के लिए परिवार इकाई का महत्व होता है। फिलहाल इसे तीन सदस्यों के आधार पर देखा जाता है, लेकिन कर्मचारी संगठन इसे पांच सदस्यों तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आज के सामाजिक ढांचे में तीन सदस्य का मानक वास्तविकता से मेल नहीं खाता। यदि परिवार इकाई बढ़ती है, तो न्यूनतम वेतन की गणना भी उसी अनुपात में ऊपर जाएगी।

4 .सेवानिवृत्ति लाभों में सुधार

कर्मचारी संगठनों का फोकस रिटायरमेंट लाभों पर भी है। वे लीव एन्कैशमेंट की सीमा 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करने की मांग उठा रहे हैं। तर्क यह है कि लंबे कार्यकाल के दौरान अर्जित अवकाश का पूरा लाभ मिलना चाहिए। जहां CGHS उपलब्ध नहीं है, वहां फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को मौजूदा 1,000 रुपये से काफी अधिक करने का सुझाव दिया गया है।

5 .पदोन्नति नीति में एकरूपता

कई विभागों में प्रमोशन की प्रक्रिया असमान है। कहीं वर्षों तक पदोन्नति नहीं मिलती, तो कहीं अपेक्षाकृत जल्दी अवसर मिल जाते हैं। कर्मचारी चाहते हैं कि सभी विभागों के लिए समान और पारदर्शी नीति लागू हो। इससे सेवा संतुष्टि और कार्यक्षमता दोनों में सुधार आ सकता है।

6 .पेंशन पर नई बहस

पेंशन व्यवस्था भी चर्चा के केंद्र में है। कुछ संगठन National Pension System और Unified Pension Scheme की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आय की स्थिरता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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