डिजिटल ट्रैकिंग से पारदर्शिता
सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में भूमि विवादों को कम किया जा सके। इसके लिए एक नई तकनीकी व्यवस्था लागू की जा रही है, जो हर जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखेगी। अब कोई दस्तावेज छिपाना या नष्ट करना आसान नहीं होगा। उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तकनीकी गलती या विवाद की स्थिति में न्यायालय का रास्ता हमेशा खुला रहेगा।
केवल 45% जमीन शुद्ध खतियानी
राज्य के आंकड़ों के अनुसार, बिहार की जमीन का केवल 45 प्रतिशत ही पूरी तरह खतियानी श्रेणी में आता है। लगभग 5 प्रतिशत जमीन के रिकॉर्ड गायब या साजिशन मिटाए गए हैं। इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने हर जिले में फाइलों और अभिलेखों की जांच का काम शुरू कर दिया है।
बक्सर और गोपालगंज में मिली अनियमितताएं
विशेष रूप से बक्सर और गोपालगंज जिलों में पुराने सर्वे में कई अनियमितताएं पाई गई हैं। डुमरांव क्षेत्र में 1989 के सर्वे के दौरान कुछ जमीनें गलत तरीके से 'अनाबाद बिहार सरकार' खाते में दर्ज कर दी गई थीं। स्थानीय लोगों ने इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उपमुख्यमंत्री ने साफ कहा कि दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस नई पहल का मुख्य मकसद है जमीन से जुड़े विवादों को जड़ से खत्म करना और हर नागरिक को उसके अधिकार का संरक्षण देना। डिजिटल रिकॉर्ड और प्रशासनिक निगरानी से अब भविष्य में भूमि से संबंधित धोखाधड़ी की संभावना काफी कम हो जाएगी। इस कदम से बिहार में खतियानी जमीन का रिकॉर्ड सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकेगा, जिससे आम जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।
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