इस अभियान का उद्घाटन विभाग की सचिव और ‘सक्षम’ की कार्यकारिणी समिति की अध्यक्ष बंदना प्रेयषी ने ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किया। साथ ही ‘सक्षम’ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी योगेश कुमार सागर भी मौजूद रहे।
सर्वे की प्रक्रिया
अभियान में राज्यभर के रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, प्रमुख बाजार और धार्मिक स्थल शामिल हैं। यहां पर भिक्षावृत्ति में संलिप्त सभी वर्गों महिला, पुरुष, बच्चे और ट्रांसजेंडर की पहचान कर डेटा संग्रह किया जाएगा और फिर मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डेटा पूरी तरह सटीक और विश्वसनीय हो।
सिर्फ आंकड़े नहीं, जीवन की राह
सरकार का मुख्य लक्ष्य केवल संख्या जुटाना नहीं, बल्कि इन व्यक्तियों को सरकारी कल्याण योजनाओं से जोड़कर उनका पुनर्वास करना है। सर्वे के बाद उन्हें आश्रय, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे वे समाज की मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भर बन सकेंगे। अभियान को 30 मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद पुनर्वास और सहायता कार्य चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
जनता से किया गया सहयोग की अपील
समाज कल्याण विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में भिक्षावृत्ति में संलिप्त व्यक्ति दिखाई दे, तो इसकी सूचना टोल-फ्री नंबर 1800-345-6262 पर दें। प्रशासन और जनभागीदारी के साथ ही यह सामाजिक बुराई जड़ से खत्म की जा सकती है। इस अभियान से बिहार में भिक्षावृत्ति के मामले कम होंगे और प्रभावित लोग सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ेंगे।

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