लंबे समय से कई शिक्षक अपने गृह जिले या सुविधाजनक स्थान पर पदस्थापन की मांग कर रहे थे। मंत्री के बयान के बाद यह उम्मीद जगी है कि स्थानांतरण नीति में व्यावहारिक बदलाव देखने को मिल सकता है।
अब तक बड़े स्तर पर हुए तबादले
विधान परिषद में पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक लगभग ढाई लाख शिक्षकों का स्थानांतरण किया जा चुका है। इस प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया और अधिकांश मामलों में संतोषजनक परिणाम मिले हैं।
सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था स्थायी नहीं बल्कि सतत प्रक्रिया है। जिला स्तर की समितियां स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या और रिक्त पदों के आधार पर आगे भी तबादले करती रहेंगी, ताकि किसी भी विद्यालय में शिक्षकों की कमी न रहे।
जहां जरूरत, वहां प्राथमिकता
सरकार की प्राथमिकता उन स्कूलों को मजबूत करना है जहां शिक्षकों की संख्या कम है। संतुलित पदस्थापन से न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा। प्रशासनिक स्तर पर यह कोशिश की जा रही है कि स्थानांतरण पारदर्शी और आवश्यकता-आधारित हो।
आकस्मिक अवकाश नियमों में बदलाव की तैयारी
सरकारी स्कूलों में आकस्मिक अवकाश की गणना को लेकर भी सवाल उठे। वर्तमान नियमों में छुट्टी की अवधि के बीच आने वाले रविवार या अन्य अवकाश को भी गिना जाता है, जिससे शिक्षकों को वास्तविक लाभ कम मिल पाता है। मंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक संशोधन कर इसे अधिक तर्कसंगत बनाया जाएगा।
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