हेल्थकेयर की चुनौतियों के बीच तकनीकी पहल
भारत का स्वास्थ्य तंत्र दुनिया के सबसे बड़े सिस्टमों में से एक है, लेकिन संसाधनों की कमी, डॉक्टरों पर अत्यधिक दबाव और डेटा प्रबंधन की दिक्कतें आज भी बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में AI आधारित टूल डॉक्टरों के लिए सहायक की भूमिका निभा सकते हैं जैसे मरीजों के डेटा का विश्लेषण, रिपोर्ट की प्रारंभिक जांच, और क्लिनिकल निर्णय में सहयोग। Ashwin AI का उद्देश्य मरीजों की देखभाल को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
तीन दोस्तों का विजन
इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत तीन पेशेवरों की साझी सोच से हुई। प्रभु राजगोपाल, जो आईआईटी मद्रास में प्रोफेसर हैं, इस पहल के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। अनिरुद्ध वर्ना सह-संस्थापक और मुख्य तकनीकी अधिकारी के रूप में इसकी तकनीकी संरचना को दिशा दे रहे हैं। विजयराजा संचालन और विस्तार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इन तीनों ने मिलकर ऐसा AI टूल विकसित किया है जो मेडिकल प्रोफेशनल्स को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सके।
AI समिट 2026 में सराहना
हाल ही में आयोजित AI समिट 2026 में इस हेल्थकेयर समाधान को विशेष रूप से सराहा गया। विशेषज्ञों ने इसे भारत के स्वास्थ्य ढांचे में उपयोगी और व्यावहारिक कदम बताया। इस मंच के बाद Ashwin AI की चर्चा तेज हो गई और इसे सरकारी स्तर पर भी गंभीरता से लिया जाने लगा।
सरकारी संस्थानों तक पहुंच
Ashwin AI की टीम फिलहाल राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के साथ मिलकर काम कर रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में से एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली जल्द ही इस तकनीक को अपने सिस्टम में शामिल करने की तैयारी में है।
AIIMS दिल्ली में इस तकनीक का उपयोग शुरू होना इस बात का संकेत है कि भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र अब डिजिटल बदलाव को अपनाने के लिए तैयार है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य सरकारी और निजी अस्पताल भी ऐसे AI प्लेटफॉर्म को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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