करियर ठहराव खत्म करने की मांग
कई विभागों के प्रतिनिधियों ने यह मुद्दा रखा कि बड़ी संख्या में कर्मचारी वर्षों तक एक ही ग्रेड में कार्य करते रहते हैं। इससे न केवल वेतन वृद्धि सीमित होती है, बल्कि कार्य संतोष भी प्रभावित होता है। प्रस्ताव है कि पूरी सेवा अवधि में कम से कम पांच प्रमोशन का ढांचा बनाया जाए, ताकि हर स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर सुनिश्चित हो।
न्यूनतम वेतन और वृद्धि दर पर मंथन
बैठक में मूल वेतन की नई सीमा, वार्षिक वेतन वृद्धि की दर और पदोन्नति के मानकों पर भी विचार हुआ। कर्मचारी संगठनों ने संकेत दिया है कि वे अपनी विस्तृत मांगों का दस्तावेज तैयार कर आयोग को सौंपेंगे। इसके आधार पर आगे की सिफारिशों का खाका तैयार किया जाएगा।
परिवार के आकार को लेकर नई बहस
वेतन निर्धारण में परिवार के सदस्यों की संख्या को लेकर भी चर्चा छिड़ी। कर्मचारियों का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था वास्तविक पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती। इसलिए वेतन संरचना में परिवार की इकाइयों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया गया है, जिससे गणना अधिक यथार्थपरक हो सके।
वेतन अंतर कम करने की कोशिश
उच्चतम और न्यूनतम वेतन के बीच मौजूद बड़े अंतर को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रस्ताव रखा गया कि इस अंतर को सीमित किया जाए, ताकि वेतन ढांचा अधिक संतुलित और न्यायसंगत बन सके।
पेंशन प्रणाली में बदलाव की मांग
पेंशन को लेकर भी कर्मचारियों ने स्पष्ट रुख अपनाया है। मौजूदा नई पेंशन व्यवस्था की जगह पुरानी पेंशन प्रणाली बहाल करने की मांग फिर दोहराई गई। साथ ही, स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित शहरों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए अतिरिक्त भत्ते की भी बात उठाई गई।
करोड़ों परिवारों की निगाहें आयोग पर
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का असर लाखों कर्मचारियों और पेंशनधारकों पर पड़ेगा। ऐसे में यह सिर्फ वेतन संशोधन का मामला नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और करियर संरचना से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। अब सभी की नजर आगामी बैठकों पर है, जहां इन प्रस्तावों पर आगे की दिशा तय हो सकती है। यदि प्रमोशन और पेंशन से जुड़े सुझावों को स्वीकार किया जाता है, तो केंद्रीय सेवाओं की संरचना में बड़ा बदलाव संभव है।

0 comments:
Post a Comment