यूपी में शिक्षकों के लिए खुशखबरी, अब नहीं रुकेगा वेतन!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में तदर्थ प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक से जुड़े मामलों में शिक्षकों के वेतन को लेकर नया स्पष्ट आदेश जारी किया गया है। अब वेतन किसी भी शिक्षक का जांच पूरी होने से पहले अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाएगा, जिससे कर्मचारियों को राहत मिली है।

वेतन रोकने की शर्तें

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि वेतन रोकने की कार्रवाई केवल इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार अभिलेखों की जांच के बाद ही की जाए।

निर्देशों के अनुसार, यदि किसी शिक्षक की तदर्थ पदोन्नति नियमानुसार की गई है, तो वह तदर्थ प्रधानाचार्य पद का वेतन पाने का पात्र होगा। वहीं, यदि किसी रिक्त पद की सूचना चयन बोर्ड को नहीं भेजी गई है, तो संबंधित शिक्षक को उस पद का वेतन नहीं मिलेगा।

पुराने भुगतान की सुरक्षा

निर्देशक ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी शिक्षक को पहले भुगतान किया जा चुका है, तो उसकी वसूली नहीं की जाएगी। केवल भविष्य में वेतन देने या रोकने की कार्रवाई निर्धारित नियमों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर होगी।

जांच में तेजी और पारदर्शिता

कुछ जिलों में जांच के नाम पर शिक्षकों का वेतन रोकने और अतिरिक्त अभिलेख मांगने की शिकायतें मिली थीं। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए निदेशक ने कहा कि पहले से मौजूद अभिलेखों के आधार पर ही मामलों की जांच पूरी की जाए, ताकि शिक्षक बिना वजह परेशान न हों और प्रशासनिक प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो।

कर्मचारियों के लिए क्या है फायदा?

इस कदम से शिक्षक अब अनावश्यक तनाव और आर्थिक दबाव से मुक्त होंगे। तदर्थ पदोन्नति और वेतन भुगतान की स्पष्ट गाइडलाइन से शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और शिक्षा के क्षेत्र में स्थिरता आएगी। उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल शिक्षकों के हित में एक सकारात्मक और समयोचित निर्णय के रूप में देखी जा रही है।

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