फिटमेंट फैक्टर: बढ़ोतरी की कुंजी
हर वेतन आयोग में सैलरी संशोधन का आधार फिटमेंट फैक्टर होता है। 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 रखा गया था। अब 8वें वेतन आयोग के लिए अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं। कुछ विशेषज्ञ 2.86 की संभावना जता रहे हैं, लेकिन व्यावहारिक दृष्टि से 1.92 का फिटमेंट फैक्टर ज्यादा संभावित माना जा रहा है। यही फैक्टर तय करेगा कि मौजूदा बेसिक पे को कितना गुणा करके नई बेसिक पे बनाई जाएगी।
गणना का तरीका:
नई बेसिक = पुरानी बेसिक × फिटमेंट फैक्टर
₹18,000 × 1.92 = ₹34,560 यानी लेवल-1 कर्मचारी की नई बेसिक सैलरी ₹34,560 हो सकती है।
HRA में कितना इजाफा?
हाउस रेंट अलाउंस (HRA) बेसिक पे का निश्चित प्रतिशत होता है। शहरों को तीन वर्गों—X, Y और Z—में बांटा जाता है। X श्रेणी (मेट्रो शहर): 27%, Y श्रेणी: 18%, Z श्रेणी: 9%, अगर कोई कर्मचारी X श्रेणी के शहर में कार्यरत है, तो नई बेसिक ₹34,560 का 27% यानी लगभग ₹9,331 HRA के रूप में मिलेगा। यह पहले की तुलना में अच्छा-खासा इजाफा होगा।
TA और DA का असर
ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) शहर और पद के अनुसार तय होता है। बड़े शहरों में औसतन ₹1,350 प्रतिमाह मानकर चल सकते हैं। जहां तक महंगाई भत्ते (DA) की बात है, तो नया वेतन आयोग लागू होने के साथ ही DA शून्य से शुरू होता है। यानी शुरुआत में DA नहीं जोड़ा जाएगा। बाद में महंगाई दर के आधार पर हर छह महीने में इसे बढ़ाया जाता है।
कुल ग्रॉस सैलरी कितनी बनती है?
अगर हम संभावित आंकड़ों को जोड़ें तो बेसिक पे: ₹34,560
HRA (27%): ₹9,331
TA: ₹1,350
DA: ₹0 (प्रारंभिक चरण में)
कुल संभावित ग्रॉस सैलरी: ₹45,241 प्रतिमाह
यह मौजूदा संरचना की तुलना में ज्यादा मजबूत बेसिक पे पर आधारित होगी। भले ही शुरुआत में DA शून्य रहे, लेकिन समय के साथ DA बढ़ने पर कुल वेतन और ऊपर जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना जरूरी है, लेकिन संभावित 1.92 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर लेवल-1 कर्मचारी की सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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