क्यों है यह सुविधा अहम?
विदेश में पासपोर्ट से जुड़ी समस्या अचानक और गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। उड़ान से पहले पासपोर्ट खो जाना, नाम या जन्मतिथि में त्रुटि, वीजा प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज़ सुधार की जरूरत, ऐसी परिस्थितियों में दूतावास तक पहुंचना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। कई देशों में भारतीय मिशन दूर शहरों में स्थित हैं, और अंतरराष्ट्रीय कॉल की लागत भी अधिक होती है। नई हेल्पलाइन इन परेशानियों को काफी हद तक कम करेगी।
कैसे काम करेगी हेल्पलाइन?
सरकार एक ऐसा तकनीकी ढांचा तैयार कर रही है, जिससे विदेश से की गई कॉल सीधे भारत स्थित ‘पासपोर्ट सेवा प्रोग्राम’ (PSP) केंद्रों तक पहुंचे। यह सेवा 24x7 और साल के 365 दिन उपलब्ध रहेगी, ताकि आपात स्थिति में भी सहायता मिल सके। कोशिश होगी कि अधिकतम देशों के लिए एक समान नंबर हो, जबकि तकनीकी जरूरत के अनुसार कुछ देशों में अलग टोल-फ्री नंबर भी जारी किए जा सकते हैं।
डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में कदम
यह कदम भारत के डिजिटल गवर्नेंस मॉडल को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की दिशा में अहम मानी जा रही है। पासपोर्ट सेवा परियोजना का तकनीकी संचालन टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के सहयोग से किया जा रहा है। देश में वर्तमान में 37 पासपोर्ट कार्यालय, 90 से अधिक सेवा केंद्र और सैकड़ों डाकघर पासपोर्ट केंद्र कार्यरत हैं। डेटा सुरक्षा और पासपोर्ट जारी करने का अंतिम अधिकार पूरी तरह भारत सरकार के पास रहेगा, जबकि तकनीकी सहायता साझेदार कंपनियां संभालेंगी।
प्रवासी भारतीयों के लिए भरोसे की डोर
इस टोल-फ्री हेल्पलाइन का उद्देश्य केवल सुविधा देना नहीं, बल्कि विदेशों में बसे भारतीयों और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करना भी है। सेवा शुरू होने के बाद चाहे कोई छात्र यूरोप में हो, पेशेवर अमेरिका में या कामगार खाड़ी देशों में उसे आपात स्थिति में त्वरित मार्गदर्शन मिल सकेगा।

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