फ्रांस से नई गठजोड़
2015-16 में भारत ने पहली बार फ्रांस से राफेल विमान खरीदने के लिए समझौता किया था। अब 114 और राफेल विमानों के लिए एक और बड़ा समझौता होने की संभावना है। फ्रांसीसी कंपनियां भारत के साथ फाइटर जेट, इंजन, एयर-लॉन्च्ड प्रिसिजन मिसाइल और एडवांस्ड एवियोनिक्स के निर्माण में सहयोग कर रही हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार भारत ने सफ्रॉन के साथ मिलकर लड़ाकू विमानों के इंजन निर्माण के लिए भी समझौता किया है। पनडुब्बी निर्माण पर भी भारत और फ्रांस चर्चा कर रहे हैं। इससे भारत को तकनीकी और रणनीतिक दोनों मोर्चों पर फायदा होगा।
रूस का योगदान अब सीमित
हालांकि रूस ने भारत के लिए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, T-90 टैंक और ब्रह्मोस मिसाइलों जैसी आपूर्ति जारी रखी है, लेकिन पिछले 3-4 सालों में कोई बड़ा डिफेंस सौदा नहीं हुआ। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण रूस नई डिलीवरी में देरी कर रहा है। उदाहरण के लिए, 2016 में ऑर्डर किए गए 5 S-400 सिस्टम में से दो अभी तक भारत को नहीं मिले।
भारत के लिए फ्रांस क्यों भरोसेमंद है
जानकार बताते हैं की, फ्रांस भारत को मजबूर नहीं करेगा और हमेशा हाई-टेक हथियार तथा लोकल प्रोडक्शन में सहयोग करेगा। मिराज-2000 और राफेल जैसे फ्रेंच विमानों ने ऑपरेशनल क्षमता साबित की है। ऐतिहासिक रिश्तों और तकनीकी सहयोग के कारण फ्रांस अब भारत का “हर मौसम का दोस्त” बन चुका है।
रूस पर निर्भरता कम, रणनीतिक विविधता बढ़ी
भारत अब सिर्फ एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता। चीन और रूस के नजदीकी रिश्तों और जियो-पॉलिटिकल हालात के चलते भारत ने अमेरिका और फ्रांस जैसी अन्य ताकतों की तरफ रुख किया। पिछले दो दशकों में भारत ने अमेरिका से करीब 20 अरब डॉलर के विमान और हेलीकॉप्टर खरीदे हैं।

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