दूरदराज की तैनाती बनी चुनौती
TRE-3 के जरिए नियुक्त कई शिक्षक अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर पदस्थापित हैं। खासकर महिला और दिव्यांग श्रेणी के शिक्षकों को पारिवारिक जिम्मेदारियों और लंबी दूरी की यात्रा के कारण अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। छोटे बच्चों की परवरिश, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और बढ़ते खर्च ने उनकी चिंताओं को और गहरा किया है।
सरकार की तैयारी और नियमावली
शिक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी और संतुलित बनाने के लिए विस्तृत नियमावली तैयार की जा रही है। इस नीति में रिक्तियों की उपलब्धता, सेवा अवधि, विशेष परिस्थितियों और महिला व दिव्यांग शिक्षकों को प्राथमिकता जैसे बिंदुओं को शामिल किए जाने की संभावना है। सरकार का मानना है कि स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बिना बड़े पैमाने पर तबादला करने से शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अंतरिम राहत, पर समाधान अधूरा
इससे पहले विभाग ने विशेष परिस्थितियों में स्थानांतरण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे और पारस्परिक (म्यूचुअल) ट्रांसफर की सीमित व्यवस्था भी लागू की गई थी। हालांकि यह कदम सभी प्रभावित शिक्षकों के लिए पर्याप्त नहीं साबित हुआ। कई शिक्षकों का कहना है कि स्थायी और व्यापक नीति के अभाव में उनकी समस्याएं पूरी तरह दूर नहीं हो पाईं।
अप्रैल 2026 पर टिकी उम्मीदें
शिक्षा मंत्री के हालिया बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि नियमित अंतरजिला स्थानांतरण की प्रक्रिया नई नियमावली लागू होने के बाद ही शुरू होगी। यदि तय समयसीमा के भीतर नीति लागू हो जाती है, तो बड़ी संख्या में शिक्षकों को अपने गृह जिले या उसके आसपास पदस्थापन का अवसर मिल सकता है।
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