योगी सरकार का बड़ा धमाका: शिक्षामित्रों के लिए 1480 करोड़ का मेगा पैकेज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मानदेय वृद्धि की घोषणा के बाद राज्य सरकार ने इसके क्रियान्वयन की तैयारियां तेज कर दी हैं। यह कदम लंबे समय से आर्थिक असंतोष झेल रहे इन शिक्षाकर्मियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।

कितना बढ़ा शिक्षामित्रों-अनुदेशकों का मानदेय?

विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि शिक्षामित्रों को अब 18,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। जबकि अंशकालिक अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा। दोनों वर्गों को यह भुगतान प्रत्येक शैक्षिक सत्र में 11 माह के लिए किया जाता है। बढ़ा हुआ मानदेय आगामी 1 अप्रैल से लागू होगा।

सरकार पर कितना अतिरिक्त बोझ?

प्रदेश में इस समय लगभग 1,43,450 शिक्षामित्र कार्यरत हैं, जिन्हें अब तक 10,000 रुपये प्रतिमाह मिलते थे। मानदेय में वृद्धि के बाद सरकार को इस मद में हर वर्ष लगभग 1,262 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। इसी प्रकार, 24,781 अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये किया गया है। इससे करीब 218 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्यय बढ़ेगा। कुल मिलाकर राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर लगभग 1,480 करोड़ रुपये अतिरिक्त वहन करने होंगे।

होली से पहले फरवरी का भुगतान

शिक्षा विभाग ने यह भी निर्णय लिया है कि फरवरी माह का मानदेय होली से पहले जारी कर दिया जाएगा, जिससे शिक्षाकर्मियों को त्योहार के समय आर्थिक सहूलियत मिल सके। महानिदेशक स्कूल शिक्षा द्वारा इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

क्या होगा असर?

मानदेय वृद्धि से हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है। लंबे समय से समान कार्य के लिए बेहतर पारिश्रमिक की मांग कर रहे शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को इससे मानसिक और आर्थिक संबल मिलेगा। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका को औपचारिक मान्यता भी मिलेगी। सरकार का यह कदम न केवल आर्थिक राहत प्रदान करेगा, बल्कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती देगा।

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