ना F-35, ना Su-57: ये हैं दुनिया के 5 सबसे तेज़ रफ्तार फाइटर जेट

नई दिल्ली। जब दुनिया के सबसे आधुनिक स्टेल्थ विमानों की बात होती है तो अक्सर F-35 Lightning II और Sukhoi Su-57 का नाम सामने आता है। लेकिन अगर पैमाना सिर्फ रफ्तार हो, तो तस्वीर कुछ और ही बनती है। कई पुराने लेकिन बेहद ताकतवर लड़ाकू विमान आज भी स्पीड के मामले में नई पीढ़ी के जेट्स को पीछे छोड़ देते हैं। आइए जानते हैं दुनिया के पांच सबसे तेज फाइटर जेट के बारे में।

1. MiG-25

रूस में विकसित मिग-25 ‘फॉक्सबैट’ को अब तक के सबसे तेज ऑपरेशनल फाइटर जेट्स में गिना जाता है। इसकी अधिकतम गति मैक 3.2 यानी लगभग 3,540 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इसे मुख्य रूप से इंटरसेप्टर भूमिका के लिए डिजाइन किया गया था, ताकि दुश्मन के ऊंची उड़ान भरने वाले विमानों को रोका जा सके। इसमें लगे शक्तिशाली टर्बोजेट इंजन इसे असाधारण स्पीड देते हैं। अपनी उम्र के बावजूद यह विमान कई देशों में लंबे समय तक सेवा दे चुका है।

2. MiG-31

मिग-31 को मिग-25 का उन्नत संस्करण माना जाता है। इसकी अधिकतम रफ्तार लगभग मैक 2.8 से 2.9 (करीब 3,000 किमी/घंटा) है। इसे लंबी दूरी तक दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को ट्रैक और इंटरसेप्ट करने के लिए तैयार किया गया। बेहतर रडार और हथियार प्रणाली के साथ यह विमान आज भी रूस की वायुसेना का अहम हिस्सा है। हालांकि इसकी रफ्तार शानदार है, लेकिन बड़े आकार के कारण यह स्टेल्थ श्रेणी में नहीं आता।

3.F-15 Eagle

अमेरिका का एफ-15 लंबे समय से एयर सुपीरियरिटी फाइटर के रूप में जाना जाता है। इसके विभिन्न संस्करण, जैसे F-15C/D और F-15EX, मैक 2.5 तक की रफ्तार हासिल कर सकते हैं। यह विमान भारी पेलोड ले जाने और लंबी दूरी से सटीक हमले करने की क्षमता रखता है। भले ही यह स्टेल्थ जेट नहीं है, लेकिन इसकी स्पीड और विश्वसनीयता इसे आज भी प्रासंगिक बनाती है।

4. Sukhoi Su-27

रूस का सु-27 ‘फ्लैंकर’ अपनी ताकतवर इंजनों और शानदार एरोडायनामिक डिजाइन के लिए जाना जाता है। इसकी अधिकतम गति मैक 2.35 (करीब 2,900 किमी/घंटा) है। यह ऊंचाई पर बेहतरीन प्रदर्शन करता है और हवाई युद्ध में अपनी चुस्ती के लिए मशहूर है। कई देशों ने इसके विभिन्न संस्करणों को अपनी वायुसेना में शामिल किया है।

5. MiG-23

मिग-23 ‘फ्लॉगर’ अपनी वेरिएबल-स्वीप विंग तकनीक के कारण अलग पहचान रखता है। इसकी टॉप स्पीड भी मैक 2.35 के आसपास है। इस डिजाइन से विमान को अलग-अलग गति और मिशन के हिसाब से पंखों का कोण बदलने की सुविधा मिलती है। शीत युद्ध के दौर में यह कई देशों की वायुसेना का अहम हिस्सा रहा।

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