हर कॉलेज में एआई की पढ़ाई
विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने एआई को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है। खास बात यह है कि एआई की पढ़ाई छात्रों के लिए निशुल्क होगी। विभागीय मंत्री सुनील कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में इसकी समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि किसी भी छात्र को आर्थिक कारणों से पीछे न रहना पड़े।
एआई आधारित प्रयोगशालाओं
वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रत्येक राजकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय को 30-30 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। यह धनराशि एआई आधारित अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं के निर्माण और उपकरणों की व्यवस्था पर खर्च होगी। इससे छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा।
आधारभूत संरचना का होगा विकास
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में आधारभूत संरचना मजबूत करने पर जोर दिया है। इसके तहत प्रयोगशालाओं, स्मार्ट क्लासरूम और शोध सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है।
शीर्ष संस्थानों का मिलेगा सहयोग
राज्य के इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के उन्नयन में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का भी सहयोग लिया जाएगा। इससे पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और शिक्षण पद्धति में सुधार होगा।
युवाओं के लिए नए अवसर
एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में तेजी से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। ऐसे में बिहार के छात्रों को राज्य में ही अत्याधुनिक शिक्षा और प्रयोगशाला सुविधाएं मिलना बड़ी उपलब्धि है। यह पहल न केवल तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाएगी, बल्कि प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी।

0 comments:
Post a Comment