अमेरिका पर आरोप और आर्थिक दबदबा
लावरोव ने कहा कि अमेरिका आर्थिक दबाव के लिए टैरिफ, प्रतिबंध और सीधे रोक जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहा है। उनका आरोप है कि अमेरिका बड़े देशों तक अपने ऊर्जा संसाधनों की पहुँच नियंत्रित करने की कोशिश में लगा है। रूस का कहना है कि ऐसे कदमों से भारत, चीन, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देश महंगे अमेरिकी LNG खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं, जबकि वे सस्ती रूसी ऊर्जा का विकल्प चुनना चाहते हैं।
भविष्य के सहयोग के लिए संकेत
लावरोव ने यह भी कहा कि रूस सभी देशों के साथ सहयोग के लिए खुला रहेगा, और अमेरिकी बनावटी रुकावटों के बावजूद वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देने की कोशिश जारी रखेगा। इस पूरे घटनाक्रम से वैश्विक ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं, और भारत जैसे ऊर्जा-आयातक देशों की स्थिति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
भारत के फैसलों पर असर नहीं
वहीं, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने स्पष्ट किया कि भारत के ऊर्जा से जुड़े निर्णय पूरी तरह देश के हितों के अनुसार ही होंगे। उन्होंने कहा कि भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था है और उसे तेल और गैस के आयात, महंगाई और उपलब्धता पर प्रभाव को ध्यान में रखते हुए ही फैसले लेने हैं।
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