भारत अब इस देश को बेचेगा हथियार, चीन की बढ़ी टेंशन!

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मलेशिया दौरे के दौरान भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करने के लिए मलेशिया को एक बड़ी डिफेंस ऑफर दिया है। इस प्रस्ताव में मलेशिया की वायु शक्ति को बढ़ाने और उनके Su-30MKM फाइटर जेट्स को अपग्रेड करने के विकल्प शामिल हैं।

Su-30MKM का अपग्रेड: मलेशिया के लिए नया विकल्प

भारत ने मलेशिया को Su-30MKM फाइटर जेट्स के मिड-लाइफ मेंटेनेंस और अपग्रेड का ऑफर दिया है। इसमें भारतीय एवियोनिक्स सिस्टम और Astra Mk-1 एयर-टू-एयर मिसाइल भी शामिल हैं। सरल शब्दों में कहें तो जिस तरह भारत अपने Su-30MKI जेट्स को ‘सुपर सुखोई’ में बदल रहा है, उसी तरह Su-30MKM को भी अपग्रेड किया जाएगा। इस अपग्रेड से मलेशिया की सुखोई फ्लीट (18 जेट्स) की क्षमता बढ़ेगी और इन विमानों की उम्र 2040 तक बढ़ाई जा सकेगी।

क्यों मलेशिया के लिए यह डील जरूरी है?

मलेशिया के पास Su-30MKM की फ्लीट छोटी है, और नए फाइटर जेट खरीदना बेहद महंगा होगा। इसके अलावा, मौजूदा विमानों में रूसी एयरफ्रेम और फ्रेंच-साउथ अफ्रीकन एवियोनिक्स का मिश्रण होने के कारण मेंटेनेंस चुनौतीपूर्ण और महंगा है। N011M Bars PESA रडार पुराना हो चुका है, जबकि आस-पास के देशों ने AESA रडार अपनाना शुरू कर दिया है। भारत का अपग्रेड प्रस्ताव इन चुनौतियों का आसान और किफायती समाधान प्रस्तुत करता है।

नौसैनिक सहयोग पर भी हैं बातचीत

भारत ने केवल हवाई प्लेटफॉर्म ही नहीं, बल्कि मलेशिया को भारतीय शिपयार्ड्स के जरिए नौसैनिक प्लेटफॉर्म देने की संभावना पर भी चर्चा की है। यह संकेत देता है कि भारत इस साझेदारी को वायु और समुद्र दोनों मोर्चों पर विस्तारित करना चाहता है।

भू-राजनीतिक और औद्योगिक महत्व

भारत की यह पेशकश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव, रूस पर लगी प्रतिबंधों और सप्लाई चेन में रुकावटों के बीच रणनीतिक महत्व रखती है। भारत खुद को भरोसेमंद डिफेंस पार्टनर के रूप में पेश कर रहा है, जो पुराने प्लेटफॉर्म्स को सपोर्ट देने में सक्षम है और क्षेत्र में नया जियो-पॉलिटिकल समीकरण पेश कर सकता है।

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