पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू हुई योजना
शिक्षा विभाग ने यह व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उन स्कूलों में लागू की है, जहां दो-दो टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। विभाग का मानना है कि डिजिटल निगरानी से स्कूलों में नियमितता बढ़ेगी और बच्चों की पढ़ाई पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी। योजना के सफल होने पर इसे पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी है।
10 फरवरी से नियम तोड़ने पर कार्रवाई
विभागीय निर्देशों के अनुसार, 10 फरवरी से उन स्कूलों के खिलाफ कदम उठाए जाएंगे, जो ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे। जिला शिक्षा पदाधिकारी को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्कूल प्रमुखों को स्पष्ट कर दिया गया है कि शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति समय पर दर्ज कराना उनकी जवाबदेही होगी।
3400 स्कूलों में शुरू हुई डिजिटल निगरानी
पटना जिले के करीब 3400 सरकारी स्कूलों को दो-दो टैबलेट दिए जा चुके हैं। जिले के सभी 14 प्रखंडों में टैबलेट के जरिए शिक्षकों की उपस्थिति, छात्रों की मौजूदगी और स्कूल की दैनिक गतिविधियों की मॉनीटरिंग शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग इन डिवाइस के इस्तेमाल पर लगातार नजर बनाए हुए है।
पढ़ाई से लेकर मिड-डे मील तक सब कुछ ऑनलाइन
नई व्यवस्था के तहत क्लास टीचर को रोजाना कक्षा में मौजूद बच्चों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। पढ़ाई के दौरान की गतिविधियों का रिकॉर्ड भी साझा करना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा मिड-डे मील के समय बच्चों की उपस्थिति और स्कूल परिसर की साफ-सफाई से जुड़ी जानकारी भी फोटो और वीडियो के माध्यम से अपलोड करनी होगी।
इन स्कूलों की मासिक शैक्षणिक रिपोर्ट भी होगी जरूरी
हर महीने के अंत में स्कूलों को यह बताना होगा कि किस विषय का कितना पाठ्यक्रम पूरा किया गया है। इस रिपोर्ट पर प्रधानाध्यापक और उपस्थित सभी शिक्षकों के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। किसी शिक्षक के हस्ताक्षर नहीं होने की स्थिति में उसे अनुपस्थित माना जाएगा।

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