यह घोषणा सोमवार को बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में की गई। गृह मंत्री ने बताया कि इस फैसले को प्रभावी बनाने के लिए सभी जिलों के जिलाधिकारियों को जल्द ही स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएंगे।
लंबित आवेदनों का मुद्दा विधानसभा में उठा
रोहतास जिले के दिनारा से विधायक आलोक कुमार सिंह ने सदन में यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही त्रि-स्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों को आर्म्स लाइसेंस देने की बात कही थी, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। कई जिलों में आवेदन देने के बाद भी एक से दो साल तक फाइलें डीएम कार्यालयों में लंबित रहती हैं।
गृह मंत्री का आश्वासन
इस पर जवाब देते हुए सम्राट चौधरी ने साफ कहा कि अब आर्म्स लाइसेंस से जुड़े आवेदनों को तय समयसीमा में निपटाया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभागीय स्तर पर सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिए जाएंगे, ताकि किसी भी आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।
सुरक्षा को लेकर चिंता
बहस के दौरान बेगूसराय से भाजपा विधायक कुंदन कुमार ने भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लाइसेंस मिलने में देरी के कारण कई पंचायत प्रतिनिधियों की जान जोखिम में पड़ जाती है। उन्होंने सदन में एक ऐसे मामले का उल्लेख किया, जहां सुरक्षा के अभाव में पंचायत प्रतिनिधि की हत्या हो गई थी।
सरकार के फैसले
अब सरकार के इस ऐलान को पंचायत प्रतिनिधियों की सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि 60 दिनों की समयसीमा को सख्ती से लागू किया गया, तो इससे न सिर्फ लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले जनप्रतिनिधियों का भरोसा भी मजबूत होगा।
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