क्यों अहम है यह फैसला?
रेयर अर्थ एलीमेंट्स आधुनिक तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, स्मार्टफोन और रक्षा उपकरणों में इनकी अनिवार्य भूमिका है। अब तक चीन इस क्षेत्र में निर्विवाद रूप से सबसे बड़ा खिलाड़ी रहा है। ऐसे में भारत द्वारा रेयर अर्थ सेक्टर में संगठित ढांचे का निर्माण चीन के दबदबे को चुनौती देने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
किन राज्यों में बनेंगे रेयर अर्थ कॉरिडोर?
सरकार ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को इस योजना के लिए चुना है। इन राज्यों में तटीय खनिज रेत, ज्ञात दुर्लभ पृथ्वी भंडार, बंदरगाह और औद्योगिक ढांचा पहले से मौजूद है। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में खनन से लेकर प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण तक एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है।
सिर्फ सड़क नहीं, पूरा इंडस्ट्रियल नेटवर्क
रेयर अर्थ कॉरिडोर को केवल परिवहन मार्ग के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह एक योजनाबद्ध ढांचा होगा, जो खनन क्षेत्रों, प्रसंस्करण संयंत्रों, रिसर्च संस्थानों और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स को आपस में जोड़ेगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, परियोजनाओं में देरी कम होगी और घरेलू उत्पादन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।
रेयर अर्थ क्या होते हैं और क्यों हैं जरूरी?
रेयर अर्थ 17 धातुओं का समूह है, जिनमें नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम, टर्बियम और सेरियम जैसे तत्व शामिल हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन मोटर्स, विंड टरबाइन, एडवांस हथियार प्रणालियों, सेमीकंडक्टर, और हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स में किया जाता है। इनसे बनने वाले स्थायी चुंबक आधुनिक तकनीक के लिए अनिवार्य हैं।
चीन का दबदबा और दुनिया की चिंता
वर्तमान में चीन वैश्विक रेयर अर्थ खनन का लगभग 60%, और प्रोसेसिंग व चुंबक निर्माण का करीब 90% नियंत्रित करता है। हाल के वर्षों में चीन द्वारा निर्यात नियमों में सख्ती से यह साफ हो गया कि एक ही देश पर अत्यधिक निर्भरता कितनी जोखिम भरी हो सकती है। यही कारण है कि अमेरिका, यूरोप और अन्य देश वैकल्पिक सप्लाई चेन की तलाश में हैं।

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