इसका सीधा मतलब यह है कि NPS मौजूदा नियमों के तहत ही आगे भी जारी रहेगा। यह योजना पहले की तरह पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के अधीन संचालित होती रहेगी और कर्मचारियों को इसमें किसी नए लाभ या बदलाव की घोषणा नहीं मिली।
बजट में ऐलान नहीं, लेकिन NPS की मजबूत ग्रोथ
हालांकि बजट भाषण में NPS पर चुप्पी रही, लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने इस स्कीम की मजबूती की तस्वीर जरूर पेश की है। सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक NPS से जुड़े सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़कर 211.7 लाख तक पहुंच गई है।
वहीं, NPS के तहत मैनेज किए जा रहे कुल फंड यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) का आकार करीब 16.1 लाख करोड़ रुपये हो गया है। FY15 से FY25 के बीच NPS सब्सक्राइबर्स की संख्या में सालाना औसतन 9.5% की वृद्धि हुई है, जबकि AUM में 37.3% की CAGR दर्ज की गई। यह आंकड़े दिखाते हैं कि NPS पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ा है।
क्यों बढ़ रहा है NPS का दायरा?
आर्थिक सर्वे के अनुसार, NPS में तेजी से बढ़ते निवेश के पीछे कई वजहें हैं। इनमें लोगों की बढ़ती भागीदारी, लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की प्रवृत्ति और मार्केट-लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम्स पर बढ़ता विश्वास प्रमुख हैं। खासतौर पर प्राइवेट सेक्टर और सैलरीड क्लास के बीच NPS को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत में रिटायरमेंट सेविंग्स अब ज्यादा संगठित और औपचारिक होती जा रही हैं।
कर्मचारियों के लिए क्या संकेत?
बजट 2026 में किसी नए ऐलान के न होने से भले ही कर्मचारियों को तत्काल राहत नहीं मिली हो, लेकिन आर्थिक सर्वे के आंकड़े यह साफ करते हैं कि NPS एक मजबूत और भरोसेमंद रिटायरमेंट स्कीम के रूप में उभर चुकी है। सरकार फिलहाल इसमें स्थिरता बनाए रखने के मूड में नजर आती है, जबकि भविष्य में सुधार या विस्तार की गुंजाइश बनी हुई है।

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