1. ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल
ब्रह्मोस मिसाइल दोनों देशों के सहयोग का सबसे सफल उदाहरण है। इसे भारतीय DRDO और रूस की NPO Mashinostroyeniya ने मिलकर बनाया है। यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है और इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। ब्रह्मोस को जमीन, हवा और पानी तीनों से दागा जा सकता है और अब इसे भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निर्यात कर रहा है, जैसे कि फिलीपींस।
2. AK-203 असॉल्ट राइफल्स
भारतीय सेना की पुरानी INSAS राइफलों को बदलने के लिए AK-203 राइफल्स का निर्माण शुरू किया गया। यह परियोजना इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के ज्वाइंट वेंचर के तहत उत्तर प्रदेश के अमेठी में संचालित हो रही है। यहां लाखों आधुनिक राइफलों का निर्माण किया जा रहा है, जो भारतीय सेना का मुख्य हथियार बन रही हैं।
3. सुखोई-30 MKI
भारतीय वायुसेना की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाला सुखोई-30 MKI मल्टी-रोल एयर सुपीरियरिटी फाइटर जेट है। इसे रूस के सुखोई कॉर्पोरेशन ने डिजाइन किया, लेकिन भारत में इसका निर्माण HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) के लाइसेंस प्रोडक्शन के तहत किया जाता है। इसमें इजरायली और फ्रांसीसी तकनीक के आधुनिक एवियोनिक्स लगे हैं, जो इसे रूस के मूल विमान से भी बेहतर बनाते हैं।
4. T-90 भीष्म टैंक
भारतीय सेना का मेन बैटल टैंक T-90 भी रूस के साथ तकनीकी सहयोग का परिणाम है। शुरुआत में इसे रूस से खरीदा गया था, लेकिन बाद में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए भारत में इसका निर्माण शुरू हुआ। यह टैंक चेन्नई के पास अवाडी हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री में बनाया जाता है और भारतीय सेना की अग्रिम पंक्ति में अहम भूमिका निभाता है।

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