हथियार की खासियत
‘डिसकॉम्बोबुलेटर’ कोई सामान्य मिसाइल या बम नहीं है। यह तकनीक विशेष रूप से साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और ऊर्जा आधारित तकनीकों का मिश्रण हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार इसके प्रमुख तत्व हो सकते हैं:
ऊर्जा-आधारित हमले: हाई-पावर माइक्रोवेव या सोनिक तरंगें, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को काम न करने लायक बना देती हैं।
साइबर हस्तक्षेप: दुश्मन के कंप्यूटर नेटवर्क और कम्युनिकेशन सिस्टम को अस्थायी रूप से बाधित करना।
ध्वनि और भ्रम तकनीक: ऑपरेटर और उपकरण दोनों को भ्रमित करने के लिए ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल।
इन तकनीकों का संयोजन दुश्मन को बिना किसी गोली के काम न करने लायक बना देता है।
वेनेजुएला में इसका उपयोग
3 जनवरी को अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेजुएला की राजधानी में एक ऑपरेशन किया। ट्रंप ने बताया कि इस मिशन में डिसकॉम्बोबुलेटर का इस्तेमाल किया गया, जिससे दुश्मन के सुरक्षा उपकरण सक्रिय नहीं हो सके। इससे ऑपरेशन सफल रहा और अमेरिकी सेना को किसी बड़े नुकसान का सामना नहीं करना पड़ा।
रणनीतिक महत्व
यह हथियार दिखाता है कि भविष्य में युद्ध सिर्फ पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक और ऊर्जा आधारित तकनीक दुश्मन की ताकत को बिना विनाश के बेकार कर सकती है। अमेरिका की यह नई तकनीक उसकी सैन्य क्षमता को मजबूती देती है और वैश्विक रणनीतिक संतुलन में बदलाव ला सकती है।

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