राबड़ी देवी की चिंता
सदन में राबड़ी देवी ने कहा कि कई महिला शिक्षक एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित हो जाती हैं, जिससे उन्हें आने-जाने और घर संभालने में कठिनाई होती है। उन्होंने कहा, "महिला शिक्षक केवल पढ़ाती नहीं हैं, बल्कि वे बाल-बच्चा संभालती हैं और घर भी देखती हैं। इसलिए उन्हें उनके अपने जिले में पोस्ट करना चाहिए।"
इस कदम से महिला शिक्षकों को काम और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और उनकी पेशेवर जिंदगी भी सहज होगी।
मंत्री ने जताई सहमति
सदन में मौजूद बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने राबड़ी देवी की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और इसे विचार के लिए ग्रहण किया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि महिला शिक्षकों के गृह जिले में पोस्टिंग के लिए जल्द ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
क्यों जरूरी है यह कदम
महिला शिक्षकों की पोस्टिंग उनके गृह जिले के बाहर होने से कई समस्याएं सामने आती हैं। लंबी दूरी तय करने में समय और ऊर्जा खर्च होती है। परिवार और बच्चों की देखभाल में कठिनाई होती है। काम और निजी जीवन में संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। गृह जिले में पोस्टिंग से ये समस्याएं काफी हद तक कम हो सकती हैं, और शिक्षकों का मनोबल भी बढ़ेगा। अगर यह लागू हुआ तो बिहार की महिला शिक्षकों के लिए यह एक बड़ी राहत और सुविधा साबित होगी।

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