कब पहुंचेंगे एस-400 के स्क्वाड्रन
रूसी अधिकारियों के अनुसार, चौथा स्क्वाड्रन मई के आखिर या जून की शुरुआत तक भारत पहुंच जाएगा। वहीं, पांचवां और आखिरी स्क्वाड्रन नवंबर तक भारतीय वायुसेना के हवाले कर दिया जाएगा। इससे भारतीय एयर डिफेंस नेटवर्क पूरी क्षमता के साथ संचालित होगा।
एस-400 खरीदने की पृष्ठभूमि
भारत और रूस के बीच इस सौदे पर अक्टूबर 2018 में समझौता हुआ था, जिसकी कुल लागत लगभग 40,000 करोड़ रुपये बताई गई थी। भारत को अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत इसलिए थी ताकि उसके दुश्मनों के फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसी आधुनिक तकनीक को रोकने में सक्षम हो सके।
ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 की भूमिका
शुरुआत में रूस में यूक्रेन युद्ध के कारण एस-400 की सप्लाई में देरी हुई थी। बावजूद इसके, तीन स्क्वाड्रन भारत भेजे गए और उन्हें वायुसेना के पश्चिमी और पूर्वोत्तर सेक्टर में तैनात किया गया। इसका असर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा गया, जब भारतीय वायुसेना ने 6 हवाई खतरों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया।
भारत का मिशन 'सुदर्शन चक्र' और एस-400
देश की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन 'सुदर्शन चक्र' की शुरुआत की। एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम इस मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सिस्टम ने पाकिस्तानी फाइटर जेट्स और एयरबोर्न सर्विलांस प्लेटफॉर्म को बेअसर किया, जिससे इसकी ताकत और महत्व उजागर हुआ।
भारत के लिए सुरक्षा और रणनीतिक महत्व
एस-400 के सभी पांच स्क्वाड्रन के भारत पहुंचने के बाद देश की हवाई सुरक्षा और रणनीतिक घेराबंदी मजबूत हो जाएगी। यह न केवल सीमा पर संभावित खतरे को रोकने में मदद करेगा, बल्कि भारत को क्षेत्रीय स्तर पर मजबूती भी देगा। इस साल एस-400 की पूरी क्षमता के साथ भारत की एयर डिफेंस व्यवस्था सक्षम होने जा रही है, जिससे देश को सुरक्षित रखने में यह सिस्टम निर्णायक भूमिका निभाएगा।
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