यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार, अमेरिकी टैरिफ और भू-राजनीतिक तनावों के कारण कई अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता का सामना कर रही हैं। ऐसे में भारत की स्थिर और संतुलित विकास दर वैश्विक निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत है।
क्यों कम है वैश्विक व्यापार बदलाव का असर?
फिच के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत अधिक घरेलू मांग पर आधारित है। भारत, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसी अर्थव्यवस्थाएं बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग निर्यात पर निर्भर नहीं हैं, इसलिए वैश्विक ट्रेड पैटर्न में बदलाव का सीधा असर इन पर सीमित रहता है।
अमेरिकी टैरिफ से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करने के लिए भारत ने हाल के महीनों में कई रणनीतिक व्यापार समझौते किए हैं। अमेरिका के साथ समझौते के अलावा यूरोपीय संघ के साथ भी सहयोग बढ़ाया गया है। यह रणनीति भारत को बहुध्रुवीय व्यापार ढांचे में संतुलन बनाने में मदद कर रही है।
7.3 ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ता भारत
भारत वर्तमान में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी के साथ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखता है। यह लक्ष्य सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि व्यापक संरचनात्मक सुधारों, बुनियादी ढांचे में निवेश, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक साझेदारियों की रणनीति का परिणाम है। मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित महंगाई और श्रम भागीदारी में सुधार इस विकास की रीढ़ हैं।

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