भारत का ‘सुपर राफेल’: F-35 से बेहतर? ट्रंप को झटका!

नई दिल्ली। भारत की रक्षा तैयारियों में एक बड़ा कदम तब सामने आया जब डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। संभावित सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत 90 राफेल F4 और 24 अत्याधुनिक F5 वैरिएंट शामिल होने की संभावना हैं। यदि यह डील तय समय में साइन होती है, तो यह भारतीय वायुसेना की ताकत को नई ऊंचाई दे सकती है।

रणनीतिक संतुलन की नई बिसात

एशिया में हवाई वर्चस्व की होड़ तेज हो चुकी है। चीन के पास बड़ी संख्या में J-20 स्टील्थ जेट हैं, जबकि पाकिस्तान अपने F-16 बेड़े के अपग्रेड और चीनी मूल के आधुनिक विमानों पर काम कर रहा है। ऐसे परिदृश्य में भारत का राफेल बेड़ा केवल एक सैन्य खरीद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का उपकरण बन सकता है।

भारत केपहले ही 36 राफेल विमानों को अपने बेड़े में शामिल कर चुका है। अब यदि 114 और विमान जुड़ते हैं साथ ही नौसेना के लिए 26 राफेल-M तो संख्या और तकनीकी क्षमता दोनों में बड़ा इजाफा होगा। इससे तीनों सेनाओं के संयुक्त अभियान में भी बेहतर तालमेल संभव होगा।

‘सुपर राफेल’ F5 की खासियत

राफेल बनाने वाली कंपनी Dassault Aviation F5 वैरिएंट को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित कर रही है। यह सिर्फ एक अपग्रेड नहीं, बल्कि 6th-जेनरेशन क्षमताओं की ओर बढ़ता कदम माना जा रहा है। जानकार इसे अमेरिका एफ-35 से तुलना कर रहे हैं और कई मामले में इसे बेहतर भी बता रहे हैं।

F-35 के विकल्प के रूप में F5?

अमेरिका का F-35 Lightning II कई देशों के लिए पांचवीं पीढ़ी का प्रमुख विकल्प रहा है। लेकिन जियो-पॉलिटिकल कारणों, लागत और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की सीमाओं के कारण कुछ देश विकल्प तलाशते हैं। ऐसे में राफेल F5 उन देशों के लिए आकर्षक हो सकता है जो उच्च तकनीक चाहते हैं, लेकिन अधिक रणनीतिक स्वायत्तता भी बनाए रखना चाहते हैं।

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