1 मंत्र, 108 लाभ: महाशिवरात्रि पर जाप से संकट होंगे दूर

धर्म डेस्क। आस्था, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का महापर्व महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी 2026, रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस पावन रात्रि में भगवान शिव की उपासना करने से विशेष फल प्राप्त होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महाशिवरात्रि की रात साधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है, क्योंकि इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रभाव सामान्य दिनों की तुलना में अधिक माना जाता है।

श्रद्धालु मानते हैं कि इस दिन किया गया मंत्र जाप जीवन के विभिन्न संकटों को कम करने में सहायक होता है। विशेष रूप से ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। यह पंचाक्षरी मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और इसे सर्व संकट निवारण का सरल एवं शक्तिशाली उपाय माना जाता है।

क्यों खास है ‘ॐ नमः शिवाय’?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ‘ॐ नमः शिवाय’ का 108 बार जाप करने से मन को शांति मिलती है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है। 108 संख्या का भी आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। ज्योतिष और योग परंपरा में इसे पूर्णता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है।

विद्वानों के अनुसार इस मंत्र का नियमित उच्चारण व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ाता है, मानसिक तनाव को कम करता है और आत्मविश्वास में वृद्धि करता है। कई श्रद्धालु महाशिवरात्रि की रात्रि में रुद्राभिषेक, व्रत और रात्रि जागरण के साथ मंत्र जाप करते हैं।

जाप कैसे करें?

माना जाता है कि स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद शिवलिंग के समक्ष दीप प्रज्वलित कर श्रद्धापूर्वक मंत्र का जाप करना चाहिए। रुद्राक्ष की माला से 108 बार मंत्र जपने की परंपरा है। भक्ति और विश्वास के साथ किया गया जाप अधिक फलदायी माना जाता है।

आस्था का पर्व!

महाशिवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ने का अवसर भी है। कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा यह पर्व देता है। आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से किया गया मंत्र जाप जीवन के संकटों को दूर करने और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने में सहायक हो सकता है।

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