‘प्रोफेशनल-ग्रेड AGI’ की ओर दौड़
सुलेमान के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट अब हम AGI विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे एआई सिस्टम तैयार करना है जो वकील, अकाउंटेंट, मार्केटिंग विशेषज्ञ या प्रोजेक्ट मैनेजर जैसे पेशेवरों के नियमित और विश्लेषणात्मक कार्यों को संभाल सकें।
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने संकेत दिया कि दस्तावेज़ तैयार करना, डेटा विश्लेषण, प्रोजेक्ट समन्वय और रिपोर्टिंग जैसे कार्य जल्द ही एआई के जिम्मे हो सकते हैं। उनका तर्क है कि अगर काम मुख्यतः कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर होता है, तो एआई उसे तेज, सस्ता और अधिक कुशल तरीके से कर सकता है।
टेक इंडस्ट्री में छंटनी और पुनर्गठन
एआई की ओर बढ़ते कदमों के बीच कई बड़ी कंपनियां अपने ढांचे में बदलाव कर रही हैं। Oracle Corporation ने एआई डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए हजारों नौकरियों में कटौती की योजना बनाई है। जबकि Amazon ने भी एआई-आधारित पुनर्गठन के तहत बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को हटाने की घोषणा की है।
भारत के लिए खतरा या अवसर?
जहां विकसित देशों में नौकरियों के जाने की आशंका गहराती दिख रही है, वहीं भारत के लिए यह दोधारी तलवार साबित हो सकती है। PwC India की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2035 तक एआई भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 550 बिलियन डॉलर का योगदान दे सकता है। भारत जैसे देश के लिए, जहां आईटी और सेवा क्षेत्र में बड़ी कार्यशक्ति है, एआई एक चुनौती भी है और वैश्विक नेतृत्व का अवसर भी।
कौन-सी नौकरियां ज्यादा प्रभावित होंगी?
विशेषज्ञों के अनुसार, वे पेशे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं जिनमें दोहराए जाने वाले विश्लेषणात्मक कार्य, डेटा प्रोसेसिंग, दस्तावेज़ ड्राफ्टिंग, बेसिक कोडिंग या रिपोर्टिंग शामिल हैं। हालांकि, रचनात्मकता, रणनीतिक सोच, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और जटिल निर्णय-निर्माण जैसे कौशल अभी भी मानवीय बढ़त बनाए रखते हैं।

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