यह घोषणा उस समय की गई जब मंत्री प्रो. संजय कुमार सिंह और डा. नवल किशोर यादव के अल्पसूचित प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार महिला शिक्षकों के अधिकारों और सुविधाओं को लेकर गंभीर है और नई व्यवस्था से पारदर्शिता तथा स्पष्ट दिशा-निर्देश सुनिश्चित होंगे।
शिशु देखभाल अवकाश पर स्पष्ट नियम
अब तक 730 दिनों के सीसीएल को लेकर कई स्तरों पर भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। अलग-अलग स्कूलों में इसकी व्याख्या और प्रक्रिया भिन्न हो सकती थी, जिससे शिक्षिकाओं को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता था।
नई एसओपी के लागू होने के बाद: अवकाश लेने की प्रक्रिया स्पष्ट होगी, स्वीकृति और अवधि को लेकर भ्रम कम होगा, प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता बढ़ेगी, शिक्षिकाओं के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा होगी। यह कदम विशेष रूप से उन शिक्षिकाओं के लिए राहत लेकर आएगा, जिन्हें बच्चों की देखभाल और नौकरी के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई होती है।
मातृत्व अवकाश में बड़ा बदलाव
सरकार ने मातृत्व अवकाश से जुड़ी वेतन व्यवस्था में भी सुधार किया है। पहले की व्यवस्था में शिक्षिकाओं को मातृत्व अवकाश के दौरान नियमित मासिक वेतन नहीं मिलता था। जब वे स्कूल लौटती थीं, तब एकमुश्त वेतन का भुगतान किया जाता था। अब इस प्रक्रिया में बदलाव करते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि मातृत्व अवकाश के दौरान हर माह वेतन का नियमित भुगतान होगा। विभाग इस संबंध में पहले ही अलग एसओपी जारी कर चुका है।
छुट्टी प्रबंधन में पारदर्शिता
सरकार ने छुट्टियों के प्रबंधन को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अवकाश आवेदन, स्वीकृति और वेतन भुगतान की प्रक्रिया सुव्यवस्थित और समयबद्ध हो। यह पहल केवल प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम है।

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