1. ट्रिटियम का क्षय
आधुनिक परमाणु हथियारों में विस्फोट की क्षमता बढ़ाने के लिए ट्रिटियम गैस का इस्तेमाल होता है। ट्रिटियम का आधा जीवन केवल 12.3 साल होता है। यदि इसे समय-समय पर बदला न जाए, तो बम पूरी ताकत से फटने की क्षमता खो देता है और केवल “फिज़ल” यानी कमजोर विस्फोट करता है।
2. प्लूटोनियम का उम्र बढ़ना
बम के मुख्य हिस्से में प्लूटोनियम होता है, जिसे 'पिट' कहा जाता है। रेडियोधर्मी विकिरण के कारण यह लगातार गर्म रहता है, जिससे छोटे-छोटे दरारें और हीलियम बुलबुले बन सकते हैं। हालांकि प्लूटोनियम सैकड़ों साल तक रेडियोधर्मी रहता है, फिर भी इसकी नियमित जांच और रख-रखाव जरूरी है।
3. इलेक्ट्रॉनिक और रासायनिक खराबी
परमाणु बम में जटिल सर्किट, बैटरी और सेंसर होते हैं। समय के साथ ये घटक खराब हो सकते हैं। इसके अलावा, विस्फोटक सामग्री, जो परमाणु विस्फोट को शुरू करती है, भी उम्र और विकिरण के कारण अपनी स्थिरता और शक्ति खो सकती है।
4. परमाणु बम का अनुमानित कार्यकाल कितना
एक परमाणु बम सामान्यतः 30 से 50 साल तक पूरी तरह कार्यशील रहता है। इसी वजह से अमेरिका और अन्य परमाणु संपन्न देश “लाइफ एक्सटेंशन प्रोग्राम” (LEP) चलाते हैं। इस कार्यक्रम के तहत पुराने बमों के घटक बदलकर उन्हें नया जैसा बनाया जाता है और उनकी शक्ति सुनिश्चित की जाती है।

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