अमेरिका भी और रूस भी… भारत के लिए दोनों की जरूरत

नई दिल्ली। भारत की विदेश नीति हमेशा ही संतुलन और रणनीति का खेल रही है। आज के वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका और रूस दोनों ही भारत के लिए अलग-अलग रूप में अहम बने हुए हैं। यह संतुलन भारत की सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक मजबूती के लिए आवश्यक है।

अमेरिका का महत्व

अमेरिका के साथ भारत का संबंध रक्षा, तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में लगातार मजबूत हो रहा है। हाल के वर्षों में भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी ने देश की सैन्य ताकत को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही, अमेरिकी निवेश और तकनीकी सहयोग से भारतीय उद्योग और स्टार्टअप सेक्टर को मजबूती मिली है। साथ ही अमेरिका के साथ भारत का व्यापार देश की ग्रोथ के लिए सबसे अहम कड़ी हैं।

रूस का महत्व

रूस भारत का परंपरागत रक्षा और ऊर्जा सहयोगी रहा है। रूस से हथियारों और मिसाइल सिस्टम की खरीद भारत की सुरक्षा को सुनिश्चित करती है। इसके अलावा, रूस से कच्चे तेल और ऊर्जा संसाधनों के निरंतर सहयोग से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत रहती है। हाल ही में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की सप्लाई भारत की सुरक्षा की रीढ़ साबित हुई है।

दोनों के बीच संतुलन

भारत की विदेश नीति का केंद्र हमेशा से संतुलन बनाना रहा है। अमेरिका और रूस दोनों के साथ अच्छे संबंध रखना भारत को वैश्विक मंच पर रणनीतिक लाभ देता है। अमेरिका के साथ तकनीकी और आर्थिक सहयोग बढ़ाते हुए, रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा सहयोग बनाए रखना भारत की मजबूती के लिए जरूरी है।

रणनीतिक जरूरत

जानकार बताते हैं की भारत को किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। अमेरिका और रूस दोनों के साथ समान दूरी बनाए रखते हुए सहयोग करना ही देश की सुरक्षा और आर्थिक हित में सबसे लाभकारी है। इस संतुलन के जरिए भारत अपने क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव को बढ़ा सकता है।

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