वर्क-फ्रॉम-होम को लेकर क्या है बड़ा बदलाव?
अब तक वर्क-फ्रॉम-होम की स्पष्ट कानूनी परिभाषा नहीं थी, लेकिन नए लेबर कोड्स में इसे वैध कार्य व्यवस्था माना गया है।
काम के घंटे और सेवा शर्तों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होंगे।
पीएफ, ग्रेच्युटी, बोनस और छुट्टियों जैसे लाभ पहले की तरह मिलते रहेंगे।
कंपनी और कर्मचारी के बीच विवाद की स्थिति में कानूनी आधार उपलब्ध रहेगा।
घर से या हाइब्रिड मॉडल में काम करने वाले कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
हाइब्रिड व्यवस्था अपनाने पर प्रमोशन या करियर ग्रोथ पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
आईटी सेक्टर को फायदा
भारत आईटी सेवाओं का वैश्विक केंद्र है। कई मल्टीनेशनल कंपनियां पहले से ही हाइब्रिड मॉडल अपना चुकी हैं। अब कानूनी मान्यता मिलने से कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना कम होगी। कंपनियां देश के किसी भी हिस्से से प्रतिभा को नियुक्त कर सकेंगी, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
बिजनेस कंटिन्यूटी को मजबूती
सरकार का मानना है कि हाइब्रिड मॉडल से कामकाज बाधित नहीं होगा। महामारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात स्थितियों में भी काम जारी रखा जा सकेगा। इससे कंपनियां अपने वैश्विक क्लाइंट्स को बेहतर और निरंतर सेवाएं दे पाएंगी।
वर्क-लाइफ बैलेंस पर सकारात्मक असर
हाइब्रिड मॉडल का सबसे बड़ा लाभ बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस है। रोजाना लंबी दूरी तय करने और ट्रैफिक में समय गंवाने की समस्या कम होगी। इससे कर्मचारियों का तनाव घटेगा और उत्पादकता बढ़ सकती है। हालांकि कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि घर से काम का मतलब 24 घंटे उपलब्ध रहना न हो। काम के घंटे, ओवरटाइम और डिजिटल मॉनिटरिंग पर संतुलित नीति जरूरी होगी।
क्या सैलरी और छुट्टियों पर असर पड़ेगा?
नए नियमों का उद्देश्य लचीलापन देना है, न कि वेतन या छुट्टियों में कटौती करना। घर से काम करने वाले कर्मचारियों पर वही नियम लागू होंगे जो कार्यालय में काम करने वालों पर लागू होते हैं। प्रमोशन, ट्रेनिंग और परफॉर्मेंस मूल्यांकन में समान अवसर सुनिश्चित करना कंपनियों की जिम्मेदारी होगी।

0 comments:
Post a Comment