भारत खरीद रहा 114 राफेल, कांप रहा पाकिस्तान, चीन चुप!

नई दिल्ली। भारत ने अपनी वायु क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। भारतीय वायुसेना के लिए 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों के खरीद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई है। यह केवल एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि सैन्य आधुनिकीकरण और स्वदेशी उत्पादन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

वायुसेना को क्यों है जरूरत?

पिछले कुछ वर्षों में वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या में कमी आई है। ऐसे में नए लड़ाकू विमानों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। 114 नए राफेल विमान शामिल होने से कई नई स्क्वाड्रन तैयार की जा सकेंगी, जिससे देश की हवाई सुरक्षा मजबूत होगी और सीमाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ेगी।

स्वदेशी निर्माण पर जोर

इस प्रस्ताव की खास बात यह है कि अधिकांश विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation भारतीय साझेदार के साथ मिलकर उत्पादन इकाई स्थापित कर सकती है। इससे तकनीक हस्तांतरण, रोजगार सृजन और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। यदि इसमें लगभग 60 प्रतिशत तक उपकरण और हथियार स्वदेशी लगाए जाते हैं, तो यह ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

पहले के सौदों का अनुभव

साल 2016 में भारत ने 36 राफेल विमान खरीदे थे। उन विमानों ने वायुसेना की मारक क्षमता को काफी बढ़ाया। इसके अलावा नौसेना के लिए भी 26 राफेल मरीन वर्जन विमान खरीदने का समझौता हो चुका है, जिन्हें स्वदेशी विमानवाहक पोत INS Vikrant पर तैनात किया जाना है।

क्या है इसके रणनीतिक महत्व

यह कदम केवल सैन्य मजबूती तक सीमित नहीं है। यह दुनिया को यह संदेश भी देता है कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए तेजी से आधुनिक तकनीक अपना रहा है। फ्रांस के साथ बढ़ती साझेदारी से दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे। इस विमान खरीद की खबर से पाकिस्तान के होश उड़ गए हैं, वहीं चीन भी इसपर नजर बनाये हुए है।

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