दुग्ध समितियों को नया जीवन
दुग्ध संघों के सुदृढ़ीकरण और पुनर्जीवन के लिए 107 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 220 नई दुग्ध समितियों का गठन और 450 समितियों का पुनर्गठन किया जाएगा। इससे गांव स्तर पर दूध संग्रहण व्यवस्था बेहतर होगी, किसानों को उचित मूल्य मिलेगा और डेयरी नेटवर्क अधिक संगठित रूप ले सकेगा।
मथुरा में आधुनिक डेयरी प्लांट
आपको बता दें की मथुरा में पहले प्रस्तावित 30 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता की डेयरी परियोजना को बढ़ाकर अब एक लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले आधुनिक प्लांट में बदला गया है। 23 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्लांट क्षेत्रीय दुग्ध उत्पादन को नई रफ्तार देगा और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा।
गो-संरक्षण पर विशेष जोर
निराश्रित गोवंशी के भरण-पोषण के लिए 2,000 करोड़ रुपये और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों की स्थापना हेतु 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह कदम सड़कों पर घूम रहे गोवंश की समस्या को कम करने और उनके बेहतर रखरखाव की दिशा में अहम माना जा रहा है।
पशु स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
पशु रोग नियंत्रण योजना के लिए 253 करोड़ रुपये तथा पशु चिकित्सालयों और सेवा केंद्रों के सुदृढ़ीकरण के लिए 155 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। साथ ही, भारत सरकार की ‘पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना’ के तहत पहली बार मोबाइल वेटरनरी यूनिट की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जिससे दूर-दराज के गांवों तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंच सकेंगी।
अनुसंधान और बीमा सुरक्षा
‘CARE’ और ‘TREC’ केंद्रों के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे उन्नत प्रजनन और पशु अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना के लिए 50 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे प्राकृतिक आपदा या बीमारी की स्थिति में पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। बकरी प्रक्षेत्रों के विकास के लिए भी अलग बजट तय किया गया है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
पशुधन विकास प्रशिक्षण केंद्रों के संचालन, प्रादेशिक पशुधन मिशन और प्रजनन सुविधाओं के विस्तार जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि सरकार पशुपालन को आय का स्थायी और लाभकारी स्रोत बनाने की दिशा में काम कर रही है। यह बजट न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती देगा। यह बजट पशुपालकों के लिए राहत और अवसर दोनों लेकर आया है, जो प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने की क्षमता रखता है।

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