Budget 2026 के बाद सोना-चांदी में भूचाल, कीमतों में भी गिरावट

नई दिल्ली: बजट 2026 पेश होते ही देश के बुलियन बाजार में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। सोने और चांदी की कीमतों में अचानक आई तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। 1 फरवरी को केंद्रीय बजट के ऐलान के बाद कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ता चला गया और रिकॉर्ड ऊंचाई से बाजार सीधे नीचे की ओर फिसलता नजर आया।

चांदी, जो हाल के दिनों में ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी थी, ने एक झटके में बड़ी गिरावट दर्ज की। वहीं सोना भी कुछ ही सत्रों में निवेशकों के लिए झटका साबित हुआ। बाजार में अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर बजट में ऐसा क्या हुआ, जिसने सोना-चांदी की चाल अचानक बदल दी।

MCX पर भारी बिकवाली

2 फरवरी को बाजार खुलते ही मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बिकवाली का दबाव साफ दिखा। अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट करीब 2 फीसदी गिरावट के साथ लगभग ₹1,44,807 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा।

वहीं चांदी में भी जोरदार प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली। मार्च एक्सपायरी का सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट करीब 4 फीसदी टूटकर लगभग ₹2,55,026 प्रति किलो पर आ गया। एक ही दिन में चांदी करीब ₹10,600 से ज्यादा फिसल गई। बजट से पहले जहां कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ था, वहीं बजट पेश होने के बाद कीमतों में कुछ हद तक सुधार जरूर देखा गया, लेकिन बाजार अब भी अस्थिर बना हुआ है।

क्यों फिसले सोना-चांदी के दाम?

पिछले कुछ दिनों में सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों के अनुसार, प्रॉफिट बुकिंग के चलते निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया, डॉलर की मजबूती से अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बढ़ा हैं और वैश्विक एक्सचेंजों पर मार्जिन बढ़ने का असर भी कीमतों पर पड़ा हैं।

30 जनवरी को जहां सोने के भाव ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम के पार थे, वहीं कुछ ही दिनों में यह गिरकर करीब ₹1,55,000 के स्तर तक आ गया। चांदी की कीमतों में भी एक झटके में ₹50,000 प्रति किलो तक की गिरावट देखी गई।

आगे क्या रहेगा रुझान?

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोना-चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत, ब्याज दरों को लेकर संकेत और डॉलर की चाल बाजार की दिशा तय करेंगे।

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