करीब 117.7 किलोमीटर लंबे इस हाईवे के निर्माण पर लगभग 7,145.14 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसे शुरुआती चरण में चार लेन के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि भविष्य में जरूरत के अनुसार इसे छह लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।
ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्य
सरकार ने इस परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। निर्माण कार्य लगभग ढाई वर्ष में पूरा करने की योजना है। हाईवे का निर्माण बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के तहत किया जाएगा, जिसमें निजी भागीदारी के माध्यम से सड़क का निर्माण और संचालन किया जाएगा। इसके साथ ही कानपुर से कबरई तक मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग के रखरखाव की जिम्मेदारी भी परियोजना का हिस्सा होगी।
यात्रा का समय होगा आधा
नया हाईवे बनने के बाद इस मार्ग पर वाहन 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल सकेंगे। इससे कानपुर से कबरई तक की यात्रा, जो वर्तमान में लगभग साढ़े तीन घंटे लेती है, घटकर करीब डेढ़ घंटे रह जाएगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और परिवहन लागत में भी कमी आने की उम्मीद है।
कई जिलों को मिलेगा लाभ
यह परियोजना कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर और महोबा सहित आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। विशेष रूप से कबरई के खनन क्षेत्र तक पहुंच आसान होने से खनिज परिवहन में तेजी आएगी। साथ ही भारी वाहनों का दबाव कई मौजूदा मार्गों पर कम होने की संभावना है। इसके अलावा उन्नाव, बंथर, पंखी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी, सुमेरपुर और भूरागढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों तक बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध होगा। इससे औद्योगिक गतिविधियों और निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कई प्रमुख मार्गों से होगा सीधा जुड़ाव
प्रस्तावित हाईवे को कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं और राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों से जोड़ा जाएगा। इनमें एनएच-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, कानपुर रिंग रोड, एसएच-46, एसएच-91, एसएच-10बी और एसएच-42 शामिल हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से माल परिवहन और यात्रियों दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।

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