यूपी सरकार का बड़ा फैसला, सभी 75 जिलों में होगा लागू

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के सभी 75 जिलों में विशेष शैक्षिक अभियान शुरू किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कक्षा पांच तक निपुण भारत मिशन को प्रभावी ढंग से लागू करना, शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीकों से प्रशिक्षित करना और बच्चों की बुनियादी पढ़ाई को मजबूत बनाना है।

पूरे प्रदेश में होंगी निपुण संकल्प कार्यशालाएं

सरकार की ओर से 6 जुलाई से 31 जुलाई तक अलग-अलग जिलों में निपुण संकल्प कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यशालाओं में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, डायट के विशेषज्ञ, बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, मेंटर और अन्य शैक्षणिक संसाधन समूह शामिल होंगे। इसका उद्देश्य पूरे प्रदेश में एक समान शैक्षणिक रणनीति तैयार करना और स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करना है।

शिक्षकों को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण

कार्यशालाओं के दौरान शिक्षकों और अधिकारियों को नई शिक्षा पद्धतियों से परिचित कराया जाएगा। इसमें कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने की तकनीक, बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने के उपाय, कैच-अप टीचिंग, पढ़ने की आदत विकसित करना, स्वतंत्र लेखन को बढ़ावा देना, शिक्षण सामग्री (टीएलएम) का बेहतर उपयोग और सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहेंगे।

डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी होगा प्रशिक्षण

इस अभियान के तहत शिक्षकों को डिजिटल माध्यमों के उपयोग का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। निपुण भारत मॉनिटरिंग सिस्टम सहित अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कार्य करने का अभ्यास कराया जाएगा, ताकि स्कूलों में तकनीक आधारित निगरानी और शिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

मास्टर ट्रेनर्स की क्षमता बढ़ाने पर फोकस

प्रदेश स्तर पर शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का तीसरा चरण भी शुरू किया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न जिलों के चयनित मास्टर ट्रेनर्स को आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान नई पाठ्यपुस्तकों के प्रभावी उपयोग, गतिविधि आधारित शिक्षण, भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित करने तथा उच्च कक्षाओं के विषयवार शिक्षण की नई तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल

यह अभियान केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा लाभ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को मिलेगा। यदि नई रणनीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो बच्चों की भाषा, गणित और अन्य विषयों में सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।

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