इस योजना का उद्देश्य विलुप्त होती देसी मछलियों का संरक्षण, उत्पादन बढ़ाना और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करना है। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक लाभार्थी 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
सभी जिलों के मत्स्य पालकों को मिलेगा लाभ
राज्य सरकार ने इस योजना को बिहार के सभी जिलों में लागू किया है। इसका लाभ ऐसे लोग उठा सकेंगे जो निजी या पट्टे पर लिए गए सरकारी तालाबों में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन करना चाहते हैं। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय स्तर पर मत्स्य उत्पादन को नई दिशा मिलेगी।
60 प्रतिशत तक मिलेगी सब्सिडी
योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पात्र लाभार्थियों को निर्धारित इकाई लागत का 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इससे छोटे और मध्यम स्तर के मत्स्य पालकों पर शुरुआती निवेश का बोझ कम होगा और वे आधुनिक तकनीकों के साथ मत्स्य पालन शुरू कर सकेंगे। सरकार को उम्मीद है कि अधिक सब्सिडी मिलने से युवा उद्यमी भी इस क्षेत्र में निवेश करने के लिए आगे आएंगे।
देसी मछलियों के संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर
बिहार की कई पारंपरिक मछली प्रजातियां समय के साथ कम होती जा रही हैं। नई योजना का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि इन देसी प्रजातियों का संरक्षण और संवर्धन भी है। यदि इन प्रजातियों का वैज्ञानिक तरीके से पालन बढ़ता है, तो जैव विविधता को भी संरक्षण मिलेगा और स्थानीय बाजारों में देसी मछलियों की उपलब्धता बढ़ेगी।

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