पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया है कि अब गैस वितरण पर लागू विशेष नियंत्रण व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में बनाई गई प्राथमिकता आधारित आपूर्ति प्रणाली भी वापस ले ली गई है।
संकट के समय उठाए गए थे विशेष कदम
इस वर्ष पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के दौरान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई थी। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया था। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अस्थायी नियंत्रण लागू किए थे, ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके और ऊर्जा संकट से बचाव हो सके।
अब सामान्य होगी गैस आपूर्ति
सरकार के ताजा फैसले के बाद प्राकृतिक गैस की आपूर्ति फिर से सामान्य कारोबारी व्यवस्था के अनुसार की जा सकेगी। इससे उद्योगों, बिजली उत्पादन इकाइयों और अन्य बड़े उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक सहज तरीके से गैस उपलब्ध होने की संभावना है।
उद्योग और बिजली क्षेत्र को राहत
नई व्यवस्था लागू होने के बाद गैस आधारित बिजली संयंत्रों, उर्वरक उद्योगों, पेट्रोकेमिकल इकाइयों और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को पर्याप्त गैस उपलब्ध होने की संभावना है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और उद्योगों की परिचालन गतिविधियां पहले की तरह सामान्य हो सकेंगी।
अर्थव्यवस्था को मिल सकता है लाभ
ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने से विनिर्माण, परिवहन और औद्योगिक क्षेत्र में लागत का दबाव कम होने की संभावना है। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिल सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात स्थिर बने रहते हैं, तो आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र में और अधिक स्थिरता देखने को मिल सकती है।

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